जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके राजनीतिक दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक रावलपिंडी में मेगा प्रोटेस्ट यानी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए रावलपिंडी प्रशासन ने इमरान समर्थकों के इकट्ठा होने, रैलियों और किसी भी तरह की विरोध गतिविधि पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। इसके साथ ही प्रशासन, पुलिस और सेना शहर में हाई अलर्ट पर हैं। सुरक्षा बलों को इमरान समर्थकों के संभावित उग्र प्रदर्शन से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रावलपिंडी प्रशासन ने इमरान खान समर्थकों के पांच या अधिक लोगों के एक जगह जमा होने पर रोक लगा दी है। किसी भी तरह की सभा, जलसा, धरना, राजनीतिक रैली और जुलूस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। डिप्टी कमिश्नर डॉ. हसन वकार चीमा द्वारा जारी आदेश के मुताबिक शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है। सरकार ने कहा है कि नागरिकों को हथियार, कीलें, नुकीले लदे डंडे, गुलेल, बॉल बेयरिंग, पेट्रोल बम, विस्फोटक या किसी भी अन्य खतरनाक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
इमरान खान को प्रताड़ित करने के लगे आरोप
बता देें कि, पाकिस्तान की वर्तमान सरकार और सेना पर इमरान खान को प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं। पहले इमरान की बहनों ने कहा कि अदियाला जेल में उनसे मिलने का प्रयास करने पर उन्हें निराशा हाथ लगी। बाद में बड़ी संख्या में पीटीआई समर्थकों ने जेल के बाहर धरना भी दिया। इमरान समर्थकों की भावनाओं को देखते हुए सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जरूरी प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। इसके तहत 1 से 3 दिसंबर तक पाबंदियां लागू रहेंगी।
नेताओं और परिवार ने मांगी मिलने की अनुमति
दरअसल, इमरान के राजनीतिक दल- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं और उनके परिजनों ने उनसे मिलने की अनुमति मांगी है। सरकार ने उन्हें रावलपिंडी की अदियाला जेल में रखा है। एहतियात बरतते हुए लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में प्रशासन ने कहा, ‘खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ समूह विरोध-प्रदर्शन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की ताक में हैं। प्रमुख प्रतिष्ठानों और संवेदनशील जगहों पर हिंसा की आशंका को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं।’
बेटों ने जताई चिंता
प्रशासनिक पाबंदियों और जेल में मुलाकात की अनुमति नहीं देने के बीच इमरान खान के परिवार का आरोप है कि बीते एक महीने से उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई है। परिजनों ने सरकार और जेल प्रशासन से उनके जिंदा होने का सबूत मांगा है। रिपोर्ट के मुताबिक इमरान के बेटे कासिम ने कहा, ‘साप्ताहिक मुलाकात के न्यायिक आदेश के बावजूद सीधी मुलाकात या संपर्क से रोका जा रहा है। इस बात की जानकारी न होना कि पिता सुरक्षित, घायल या जीवित हैं, मनोवैज्ञानिक यातना जैसा है।’ उन्होंने कहा कि पिता को मृत्युदंड पाने वाले कैदियों की तरह अलग सेल में रखा गया है। सरकार उनके बारे में ठोस जानकारी नहीं दे रही है। इस कारण हमारा सबसे बड़ा डर यही है कि कुछ ऐसा छिपाया जा रहा है, जो ठीक नहीं है।
भीषण संघर्ष के मुहाने पर पड़ोसी देश
दरअसल, पाकिस्तान का वर्तमान संकट इमरान खान बनाम सेना की लड़ाई से कहीं बड़ा हो चुका है। अब सत्ता का दांव सिर्फ राजनीतिक वर्चस्व का नहीं, बल्कि सेना के संस्थागत प्रभुत्व, प्रांतों की क्षेत्रीय पहचान और अर्थव्यवस्था की बुनियादी जीवंतता से जुड़ चुका है। सैन्य रणनीति, जनसमर्थन का भूगोल और आर्थिक दिवालियापन एक दूसरे से टकराते हैं तो देश खतरनाक मायनों में पुनर्गठन के दौर में प्रवेश करता है। पाकिस्तान में भी यही हो रहा है। विद्रोह की सुलगती चिंगारी से वह भीषण संघर्ष के मुहाने पर पहुंच चुका है।

