Saturday, March 14, 2026
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Delhi News: जेएनयू में शरजील-उमर की जमानत खारिज होने पर आधी रात को विरोध प्रदर्शन, पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी

जनवाणी ब्यूरो |

दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में उस समय तनाव बढ़ गया जब छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज करने के बाद विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर विवादित और आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

सोमवार रात हुए एक विरोध प्रदर्शन के एक कथित वीडियो के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की गई। यह घटना 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में छात्रों पर हुए हमले की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुई। जेएनयू छात्र संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटना की जांच कर रहा है और इसके तथ्यों को स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष ने कहा कि हर साल, छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। मिश्रा ने बताया, “विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और किसी पर भी व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया था। ये नारे किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं थे।”

5 जनवरी, 2020 को जेएनयू कैंपस में हिंसा फैल गई थी, जब नकाबपोश लोगों की एक भीड़ परिसर में घुस आई और तीन हॉस्टलों में छात्रों को निशाना बनाया। लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को पीटा गया और खिड़कियां, फर्नीचर और निजी सामान को नुकसान पहुंचाया गया। लगभग दो घंटे तक कैंपस में अफरा-तफरी मची रही, जिसमें जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष समेत कम से कम 28 लोग घायल हो गए।

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, ‘बात जेएनयू की नहीं है, कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं। ये अफजल गुरू के लिए भी नारे लगाते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों के समर्थन में, नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं लेकिन कुल मिलाकर इनके नारे बस नारे तक ही सीमित हैं। जहां नक्सलवादी होते थे वहां नक्सलवादी खत्म हो गए हैं, जहां आतंकवादी होते थे वहां आतंकवादी खत्म हो गए हैं और जिन लोगों ने दिल्ली के खिलाफ साजिश रची उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, तो यह बस उनकी छटपटाहट है।’

दिल्ली के मंत्री आशीष सूद

दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने कल जेएनयू कैंपस में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी पर कहा, ‘उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू में इस प्रकार के नारे लगना निंदनीय है। शरजील इमाम ने चिकन नेक काटकर पूर्वोत्तर भारत को अलग करने की बात कही थी। उमर खालिद ने ‘भारत के टुकड़े-टुकड़े होंगे’ के नारे लगाए थे और 2020 के दंगों में भी उसका हाथ पाया गया था। ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति इसलिए दिखाई जाती है क्योंकि इस विधानसभा में ऐसे लोग हैं जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया था। जब आप ऐसे लोगों को बढ़ावा देते हैं, तो जेएनयू में ऐसे गैर-जिम्मेदार तत्व सिर उठाते हैं, जिसकी मैं निंदा करता हूं। जेएनयू में जो हुआ है, जहां शरजील इमाम और उमर खालिद का एक तरह से समर्थन किया गया है, यह निंदनीय है और देश के खिलाफ है।’

अरविंद सिंह लवली ने कहा

भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा, ‘इस देश में कोई भी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है। इस देश में न्याय व्यवस्था से ऊपर कुछ भी नहीं है, और सरकार भी इसका पालन करने के लिए बाध्य है। इस तरह से उस न्याय का विरोध करना और सिर्फ राजनीति करना, इसका मतलब है कि आप देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। मैं ऐसे लोगों की निंदा करता हूं जो इस देश को टुकड़ों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं।’

वहीं, भाजपा नेता करनैल सिंह ने कहा, ‘ये शरारती तत्व देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमारा देश कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम है। ऐसा कुछ नहीं होने वाला है।’

उधर, भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा, ‘ये जो देश विरोधी कार्य कर रहे हैं, उनपर नकेल कसने का समय आ गया है। मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस इसपर सख्त कार्रवाई करेगी।’

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