Monday, March 16, 2026
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Supreme Court: एमटेक ग्रुप के अरविंद धाम को जमानत, ₹27,000 करोड़ के बैंक घोटाले में आरोपित

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 27,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में एमटेक समूह के पूर्व चेयरपर्सन अरविंद धाम को जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें धाम की जमानत याचिका खारिज की गई थी। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति आराधे ने फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि अदालत ने इस मामले में धाम की अपील स्वीकार कर ली है।

क्या था हाईकोर्ट का तर्क?

हाईकोर्ट ने पिछले साल 19 अगस्त को अरविंद धाम की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह तर्क दिया था कि समय से पहले रिहाई से मामले की जवाबदेही तय करने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध देश की वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने यह रेखांकित किया कि ऐसे मामलों में जांच जटिल और लंबी होती है।

उच्च न्यायालय ने आगे यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक और गहन जांच आवश्यक है, ताकि निर्दोष व्यक्तियों को गलत तरीके से फंसाया न जाए और वास्तविक अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत एमटेक समूह की कंपनियों की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली थीं। सितंबर 2024 में एजेंसी ने 5,115.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की थीं। जांच के दौरान, ईडी ने 145 एकड़ जमीन (राजस्थान और पंजाब में), दिल्ली-एनसीआर में 342 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां, और 112.5 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस को कुर्क किया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी ईडी की जांच

ईडी की जांच 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी। धाम को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया और सितंबर 2024 में चार्जशीट दाखिल की गई। एजेंसी का आरोप है कि एमटेक समूह की कंपनियों ने वित्तीय विवरणों में हेरफेर करके फर्जी ऋण और संपत्तियां दिखाईं। इसके परिणामस्वरूप बैंकों को 80% से अधिक का ‘हेयरकट’ झेलना पड़ा और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ।

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