यह मीडिया, पत्रकार, पर्यावरणविद् समझते क्या है घंटा! टक्के भर की तो इनमें अक्ल नहीं!
आ जाते है जनसंपर्क करने! अरे यह टैग लाइन तो हमारी स्थाई नौकरशाही की थी। हां, वैसे संगत का असर अस्थाई कार्यपालिका पर भी पड़ना ही है। बोले तो बड़बोले मंत्री संत्रियों पर,जो 5 साल में खुद को स्थाई समझने की भूल कर बैठते है बेचारे। यह भी जानते क्या है विकास के बारे में! बस जब देखो तब विरोध, विरोध प्रदर्शन! यहां कोई विपक्ष थोड़ी ना बैठा है जनाब। अरे भाई रूल्स- रेगुलेशन हम बनाते हैं! कहते हुए कलेक्टर साहब ने कोचिंग के बच्चों में कॉर्नर पर विंडो सीट पर बैठी कमसिन, जवान, खूबसूरत विडो महिला को आंखें नचकाते हुए कहा। अरे! एक बार बस तुम आॅफिसर बन जाओ! फिर तो गोबर, गटर मतलब (सिविल से सीवर लाइन) कचरा प्रबंधन पर रिसर्च करने के लिए भी हम आपको स्विट्जरलैंड घुमा देंगे। यहां तक पहुंचे हो तो अवश्य ही आप में कुछ बात तो जरूर होगी!
चलो, देखो चारों तरफ अरावली, इंदौर की बात कौन कर रहा है? इतने ज्ञानवर्धक वीडियो रात-दिन सोशल मीडिया पर चलते रहे। क्या इसमें एकाध महानुभाव को छोड़कर किसी भी फेमस ज्ञानी ने वीडियो डाला? समझ रहे हैं ना आप! जल जीवन मिशन, मिशन जल जीवन इसमें कितना कमीशन यह तो टॉप टू बॉटम हम जानते हैं। शब्द शुद्धि का खेल है बस! देखो उन सड़कों पर तुम ही नहीं हम भी चलते हैं। हमें तो गड्ढे नजर नहीं आते। पता नहीं तुम्हें यह पहाड़ कहां से कटे हुए नजर आते हैं। हमें तो यह हिमालय से भी ऊंचे-ऊंचे नजर आते हैं। अब बताओ खनन नहीं करेंगे तो मकान महल कैसे बनेंगे! सरकार का राजस्व कैसे बढ़ेगा? लग्जरी गाड़ी, लाइफस्टाइल, विदेश यात्रा कैसे होगी? मनुष्य की पहचान ब्रांडेड जूतों,कपड़ों से होती है। उन्हें कब पहनोगे! ओह! स्वप्न में अचानक खनन पड़ता है। खनन का मतलब यह मत समझ लेना कि उसे अरावली से विशाल स्वर्ण भंडार मिल गया है?
शायद किसी का फोन बज रहा है। ‘मेरा बलम थानेदार चलावे जिप्सी’। अरे भाई! आज जिप्सी से कौन पटता है? जिप्सी में व्हिस्की ना हो तो नशा कहां चढ़ता है? वैसे आज भी थानेदार हमेशा सीधी गाय के थन ही दुहता है। गरीब की गाय लात कहां मारती है? हां तो हम क्या कह रहे थे! वैसे इनके आईएएस आॅफिसर बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है! सुना है खाक पंचायत ने लड़की भगाने के जुर्म में गांव से बहिष्कृत किया था साहब को! बस फिर क्या था! उन्होंने गहन पढ़ाई की और आज उस स्टेटस पर पहुंचे। जहां मजाल है, कोई घंटा पहुंच जाए! जी हां वे सभी विषयों के ज्ञाता हैं। नदियों से नहर,नाली वे ही तो निकालते हैं। फिर उन्हें टेंडर जारी कर घटिया पाइपलाइन से गरीबों की बस्ती में पहुंचाते हैं। इतना बड़ा भगीरथ प्रयास का गुरू घंटाल आप कर पाएंगे! इनकी कार्य कुशलता, प्रतिस्पर्धा, अभिप्रेरणा अब अत्यंत व्यापक, विस्तृत, घटकों में रिलीज हो रही है। जो इन्हें मौद्रिक ही नहीं अमौद्रिक प्रोत्साहन देती नजर आ रही है। अब यह रियल ही नहीं रिल्स हीरो भी बन गए हैं।

