जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कई अहम टिप्पणियां कीं। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वंदना जैन की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने पशु प्रेम, सार्वजनिक सुरक्षा और गेटेड कम्युनिटी के अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब पशु प्रेमियों की बात की जाती है, तो इसमें सभी जानवर शामिल होते हैं। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं अपने घर में कोई जानवर रखना चाहता हूं या नहीं, यह मेरा विवेक है।”
‘कल कोई भैंस ले आए तो क्या करेंगे?’
गेटेड कम्युनिटी में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह फैसला समुदाय का होना चाहिए। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा, “मान लीजिए 90 प्रतिशत लोग मानते हैं कि कुत्तों की मौजूदगी बच्चों के लिए खतरनाक है, लेकिन 10 प्रतिशत लोग कुत्तों को रखने पर जोर देते हैं। कल कोई भैंस भी ले आ सकता है और कह सकता है कि उसे दूध चाहिए।”
मतदान से फैसला करने का प्रावधान हो: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिसके तहत गेटेड कम्युनिटी मतदान के जरिए यह तय कर सके कि परिसर में आवारा कुत्तों को घूमने दिया जाए या नहीं।
इस दौरान अधिवक्ता वंदना जैन ने कहा कि उनका विरोध कुत्तों से नहीं है, बल्कि बढ़ते खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर है। उन्होंने बताया कि देश में करीब 6.2 करोड़ कुत्तों की आबादी है और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
कुत्तों को लेकर याचिकाकर्ताओं से सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि क्या कुत्तों को यह सिखाया जा सकता है कि वे किसी को न काटें? अदालत ने कहा कि यह पहचानना मुश्किल है कि कौन सा कुत्ता आक्रामक हो सकता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पशु प्रेमियों को सड़कों पर नहीं, बल्कि शेल्टर में मौजूद कुत्तों को भोजन कराना चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले 18 दिसंबर 2025 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम के कुछ नियमों को ‘अमानवीय’ बताए जाने पर कड़ा रुख अपनाया था और कहा था कि अगली सुनवाई में एक वीडियो दिखाकर यह पूछा जाएगा कि आखिर मानवता होती क्या है। इस मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

