जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जो मोदी सरकार का इस वित्तीय वर्ष के लिए 12वां आम बजट होगा। इस बजट से शिक्षा और रोजगार क्षेत्रों में कई नई पहल की उम्मीद जताई जा रही है। खासतौर पर, शिक्षा पर खर्च में बढ़ोतरी और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की संभावना है। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में क्या उम्मीदें हैं।
डिजिटल शिक्षा में असमानता को समाप्त करना
आज के डिजिटल युग में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में अभी भी डिजिटल असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र आज भी ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल संसाधनों से वंचित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे हर छात्र तक इंटरनेट कनेक्शन, डिजिटल उपकरण और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म आसानी से उपलब्ध हो सकें। इससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित होंगे और छात्रों को बेहतर शिक्षा प्राप्त होगी।
शैक्षिक संस्थानों को आधुनिक बनाना
केवल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटें बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। मौजूदा शिक्षा संस्थानों में तकनीकी और आधुनिक संसाधनों की भारी कमी है। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक रिसर्च लैब और तकनीकी उपकरणों से सुसज्जित कैंपस अब जरूरी हो गए हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बजट में इन सुविधाओं के लिए विशेष फंड आवंटित किया जाए, ताकि शिक्षा संस्थान छात्रों को बेहतर और समकालीन संसाधन मुहैया करा सकें।
कौशल विकास और रोजगार में वृद्धि
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नए मेगा स्किल हब की स्थापना की आवश्यकता है। सरकारी स्कूलों में कोडिंग और डिजिटल शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा और शोध में विज्ञान स्ट्रीम के लिए अतिरिक्त सीटें उपलब्ध कराई जाएं। आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड करने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को इंडस्ट्री के सहयोग से इंटर्नशिप और व्यावसायिक प्रशिक्षण के अधिक अवसर मिल सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT और IIM में सीटों की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है, क्योंकि इन संस्थानों में आवेदन की संख्या बहुत अधिक है। इसके अलावा, कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड का एक हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आवंटित किया जाना चाहिए।

