जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: वरिष्ठ राजनेता किशन चंद (केसी) त्यागी अब रालोद में शामिल हो गए हैं। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने उन्हें रालोद की सदस्यता दिलाई। केसी त्यागी, जो नौवीं लोकसभा में हापुड़-गाजियाबाद से सांसद रह चुके हैं, पिछले 26 वर्षों से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का हिस्सा रहे थे। उनके रालोद में शामिल होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली जाने के बाद जदयू से विदाई लेने का फैसला किया। उनका मानना है कि बिहार तक सीमित जदयू में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं के लिए भविष्य में कोई विशेष भूमिका नहीं बचती। अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और आपातकाल के समय जॉर्ज फर्नांडिस, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान जैसे दिग्गजों के साथ काम करने के अनुभव के साथ, केसी त्यागी ने पिछले 26 वर्षों में केंद्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।
नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को देखते हुए, केसी त्यागी का रालोद में शामिल होना न केवल उन्हें सक्रिय राजनीति में बनाए रखने का प्रयास है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी राजनीतिक वापसी का भी संकेत देता है।
रालोद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का परिदृश्य
रालोद, पारंपरिक रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित एक क्षेत्रीय दल, चुनाव जीतने के लिए अक्सर अन्य दलों के सहयोग पर निर्भर रहा है। चौधरी चरण सिंह के बाद उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह और अब पौत्र जयंत चौधरी, जाट समुदाय में वह मजबूत पकड़ बनाए रखने में संघर्ष कर रहे हैं, जो चौधरी चरण सिंह के समय थी। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के टिकैत बंधुओं जैसे नेताओं ने भी इस विरासत में चुनौती पेश की है।
केसी त्यागी के आगमन का संभावित प्रभाव
केसी त्यागी के रालोद में शामिल होने से पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निश्चित तौर पर फायदा मिलने की संभावना है। वर्तमान में रालोद भाजपा के गठबंधन में है, और जयंत चौधरी मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में रालोद और भाजपा के मिलकर चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है, ऐसे में केसी त्यागी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
प्रभावित सीटें
मोदीनगर, मुरादनगर और सिवालखास जैसी सीटों पर, जहां भाजपा के साथ गठबंधन में रालोद का दावा है, केसी त्यागी अपने करीबी नेताओं को टिकट दिलाने का दबाव बना सकते हैं। इससे इन इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ सकती है और चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

