Friday, April 17, 2026
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महिला आरक्षण बिल पर राजनीतिक तूफान

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संसद के विशेष सत्र में 16 अप्रैल को महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए गए। इन प्रस्तावों के तहत वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। संशोधन विधेयक में लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि वर्तमान में यह संख्या 543 है।
जो विधेयक पेश किए गए हैं वो हैं, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 । प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों में अधिकतम 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं। सीटों के अंतिम निर्धारण के लिए परिसीमन प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। नए प्रावधानों के तहत लोकसभा की 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन विधेयकों पर संसद में 18 अप्रैल तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

इन बिलों का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी, एआईएमआईएम, सीपीआई एम समेत विपक्षी दलों ने विरोध किया है। विपक्ष इसको बीजेपी की चुनावी रणनीति के तौर पर देख रहा है। हालांकि पीएम मोदी के दिशा निर्देशन में गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकें भी की हैं। इस दौरान सीट बढ़ाने के ‘स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला’ पर चर्चा हुई, जिसमें मौजूदा सीटों को बढ़ाकर नए ढांचे में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें तय की जाएंगी। इससे लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर करीब 800 से ज्यादा हो सकती हैं। इस बीच दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन पर ऐतराज किया है। इसलिए सरकार अब ऐसा फॉर्मूला लाने की कोशिश कर रही है, जिससे सभी राज्यों के हितों का संतुलन बना रहे।

महिला आरक्षण प्रस्ताव के मुताबिक 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे। गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई है, जबकि कांग्रेस से चर्चा बाकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में विधेयक संसद में पेश किया। कुशल प्रबंधन के चलते यह लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही पारित हो गया। 106वा संविधान संशोधन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून बना।

विपक्ष का कहना है कि असली मसला महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। इसके बावजूद विपक्ष के पास कोई रास्ता नहीं है। सरकार की ओर से खास कर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से महिला आरक्षण का ऐसा माहौल बनाया गया है कि अगर विपक्ष ने इसका विरोध किया तो उसको महिला विरोधी माना जाहिए। संसद की कार्यवाही में विपक्षी पार्टियां परिसीमन की मुद्दा उठाएंगी लेकिन मजबूरी में उनको इसका समर्थन करना होगा, जैसे सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून का किया था।

जानकारों के मुताबिक पेश विधेयकों को पास कराना आसान नहीं होगा। ये संविधान में संशोधन के लिए विधेयक हैं, जिन्हें पास कराने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होगी। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत, संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। इसके लिए सरकार को कुछ विपक्षी पार्टियों और ऐसी पार्टियों से बात करनी होगी, जो मौजूदा लोकसभा में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

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