जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है, लेकिन यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण का साधन नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल 2023 में पास हो चुका है, और इसे महिला आरक्षण बिल कहना गलत है।
परिसीमन से नहीं होगा महिला सशक्तिकरण
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि परिसीमन के जरिए महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुराना बिल लाकर इसे पास कराया जा सकता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार देश के ओबीसी समुदाय को ताकत नहीं देना चाहती और यह एससी-एसटी के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है। उनका कहना था कि यह विधेयक देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास है, और इसके लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा को शक्ति में गिरावट का डर
विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि आगामी 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व प्रभावित न हो। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा को अपनी शक्ति में गिरावट का डर सता रहा है और यह सरकार भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने का प्रयास कर रही है।
अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर किया
राहुल गांधी ने हल्के अंदाज में कहा, “कल मैंने अपनी बहन को देखा, जिसने पाँच मिनट में वह कर दिखाया जो मैंने अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाया – अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना।”
दक्षिण और छोटे राज्यों को आश्वासन
राहुल गांधी ने कहा कि दक्षिणी राज्यों और छोटे राज्यों को घबराने की जरूरत नहीं है, और विपक्ष उनकी प्रतिनिधित्व को बचाने के लिए सशक्त प्रयास करेगा। उन्होंने लोकसभा में कहा कि सरकार की यह कोशिश राष्ट्रविरोधी कृत्य के समान है, और विपक्ष इसे हराने के लिए एकजुट है।

