जनवाणी ब्यूरो |
दौराला: मई का महीना आते ही जहां आमतौर पर झुलसाती धूप और तपती हवाओं का खौफ लोगों के मन में घर कर जाता है, वहीं साल 2026 में मौसम ने अपनी पुरानी परंपरा को तोड़ने का संकेत दे दिया है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार इस बार मई में सामान्य से करीब 110 प्रतिशत अधिक बारिश होने की संभावना है, जो बीते दशकों के औसत आंकड़ों को चुनौती देती नजर आ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1971 से 2020 तक मई महीने में औसतन 61.4 मिमी बारिश दर्ज की जाती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां पूरी तरह बदली हुई हैं। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और लगातार बन रहे मौसमी सिस्टम के कारण बादल ज्यादा सक्रिय रहेंगे, जिससे कई इलाकों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव के चलते मई की भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिलेगी। तापमान में सामान्य से गिरावट रहने की संभावना है, जिससे लू के प्रकोप में कमी आ सकती है। हालांकि, राहत के बीच चेतावनी भी दी गई है कि गुजरात, महाराष्ट्र और हिमालयी राज्यों में 3 से 4 दिन अतिरिक्त हीटवेव चल सकती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान अल-नीनो के सक्रिय होने की आशंका भी जताई गई है, जो आगे चलकर बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम का यह बदला मिजाज जहां एक ओर गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर असामान्य परिस्थितियों के लिए सतर्क रहने की जरूरत भी बढ़ा रहा है।
असमान बारिश और चरम घटनाओं का खतरा
इस बार बारिश का वितरण भी सामान्य नहीं रहने की संभावना है।
मध्य भारत के कई हिस्सों में कम वर्षा हो सकती है, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के चलते कम बारिश के बीच अचानक तेज और अत्यधिक वर्षा (एक्सट्रीम रेनफॉल) की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
खेती और महंगाई पर असर की आशंका
कमजोर मानसून का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है।
बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में फसलों की पैदावार घट सकती है। जिससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा।
जलाशयों में पानी का स्तर गिरने और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई गई है।
एक नजर में
मई: 110% ज्यादा बारिश का अनुमान
तापमान: मई में राहत, पर कुछ जगह हीटवेव संभव
मानसून: 92% (सामान्य से कम)
कारण: एल नीनो प्रभाव
खतरा: असमान और चरम वर्षा
वर्जन
इस बार मौसम दो विपरीत तस्वीरें पेश कर रहा है। मई में राहत भरी बारिश और ठंडी हवाएं, लेकिन आगे चलकर कमजोर मानसून की चिंता। ऐसे में किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी को बदलते मौसम के इस नए पैटर्न के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। कुल मिलाकर, इस बार मई में आसमान सिर्फ आग नहीं उगलेगा, बल्कि बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक के साथ बारिश का नया अध्याय लिखेगा, जो बीते कई सालों के रिकॉर्ड को बदलने की ओर इशारा कर रहा है।
डॉ. एम शमीम, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान

