जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत सपाट रही, लेकिन कुछ ही देर बाद बिकवाली हावी होने से बाजार दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में जहां बीएसई सेंसेक्स 100 अंकों से अधिक चढ़ा और एनएसई निफ्टी 24,350 के पार पहुंच गया था, वहीं बाद में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
बीएसई सेंसेक्स 160.24 अंक टूटकर 77,798.28 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 30.25 अंक गिरकर 24,300.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में दिनभर तेज उतार-चढ़ाव बना रहा।
रुपये में भी कमजोरी
शेयर बाजार की नरमी के बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे टूटकर 94.77 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर संभावित 14 सूत्रीय समझौते की चर्चा के बावजूद निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
एफआईआई बिकवाली से बाजार पर दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को एफआईआई ने 5,834.90 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे।
हालांकि इससे पहले बुधवार को बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 940.73 अंक उछलकर 77,958.52 पर और निफ्टी 298.15 अंक चढ़कर 24,330.95 पर बंद हुआ था।
इन शेयरों में दिखी तेजी
बाजार की अस्थिरता के बीच कुछ दिग्गज शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
- टॉप गेनर्स
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- इटरनल
- टाटा स्टील
- अल्ट्राटेक सीमेंट
- आईसीआईसीआई बैंक
- मारुति
- टॉप लूजर्स
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- हिंदुस्तान यूनिलीवर
- अडानी पोर्ट्स
- पावर ग्रिड
- टेक महिंद्रा
- सन फार्मा
- कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 0.77 प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
उधर एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त में रहे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे।
विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। उनके मुताबिक बाजार इस समय “उम्मीद और डर” के बीच झूल रहा है।
वहीं एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक संकेत सकारात्मक हैं और ऊर्जा कीमतों में नरमी अल्पकालिक दबाव कम कर सकती है, लेकिन निवेशक अभी भी बेहद सतर्क हैं।
आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की चाल काफी हद तक तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी
- पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
- कच्चे तेल की कीमतें
- विदेशी निवेशकों का रुख
यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं और एफआईआई बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

