नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। दिवंगत उद्योगपति और सोना ग्रुप के मालिक संजय कपूर की मौत के बाद शुरू हुए करोड़ों की संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट के विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से अदालतों में चल रही इस कानूनी लड़ाई को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया है।
मध्यस्थता से समाधान की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर यह मामला इसी तरह अदालतों में चलता रहा, तो इसे सुलझने में कई दशक लग सकते हैं। इसलिए अब अदालत चाहती है कि परिवार आपसी बातचीत और समझौते के जरिए विवाद को खत्म करने की कोशिश करे।
अदालत ने सभी पक्षों को सख्त निर्देश भी दिए हैं कि इस मामले से संबंधित कोई बयान मीडिया में न दें और सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट न करें। इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 में होगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला संजय कपूर की मौत के बाद उनकी संपत्ति, फैमिली ट्रस्ट और विरासत को लेकर शुरू हुआ। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की। उनका आरोप है कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बनाया गया। रानी कपूर का कहना है कि इस ट्रस्ट के जरिए परिवार की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर को भी नोटिस जारी किया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सलाह दी थी कि वे मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालें।
इस विवाद में प्रिया कपूर, रानी कपूर, अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके बच्चे समायरा कपूर व कियान कपूर भी शामिल हैं। करिश्मा कपूर ने अपने बच्चों की ओर से उत्तराधिकार से संबंधित मामला दायर किया था। वहीं रानी कपूर का दावा है कि उनकी संपत्ति को 2017 में कथित अवैध तरीकों से फैमिली ट्रस्ट में डाल दिया गया।
रानी कपूर के आरोप
रानी कपूर ने आरोप लगाया कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का फायदा उठाकर उन्हें कई दस्तावेजों पर साइन करवाए गए, जिनमें कुछ दस्तावेज खाली थे और उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना साइन करवा लिए गए। उन्होंने अपने बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर पर संपत्ति ट्रांसफर करने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, प्रिया कपूर ने इन आरोपों को गलत बताया और परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया। उनका दावा है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई।

