जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के गठन के बाद सोमवार को राज्य की नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होने जा रही है। राज्य के नौवें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में यह बैठक भाजपा सरकार की पहली महत्वपूर्ण प्रशासनिक कवायद होगी। बैठक हावड़ा जिले के मंदरतला स्थित वर्तमान राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित होगी।
नबान्न से क्यों शुरू हो रहा कामकाज?
नबान्न की इमारत मूल रूप से वाममोर्चा शासन के दौरान गारमेंट्स हब के रूप में तैयार की गई थी। 2011 में सत्ता में आने के दो साल बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2013 में राज्य सचिवालय को राइटर्स बिल्डिंग से नबान्न स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि यह फैसला उनके ज्योतिषी की सलाह पर लिया गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर 2013 से राज्य सचिवालय का कामकाज नबान्न से शुरू हुआ।
राइटर्स बिल्डिंग में लौटेगा सचिवालय
भाजपा की नई सरकार बनने के बाद राज्य सचिवालय को फिर से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में ले जाने का निर्णय लिया गया है। यह इमारत पश्चिम बंगाल की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। ममता बनर्जी से पहले के सभी मुख्यमंत्री, प्रफुल्ल चंद्र घोष से लेकर बुद्धदेव भट्टाचार्य तक, यहीं से शासन चलाते रहे।
शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का दिन सुबह 10:30 बजे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य के साथ बैठक से शुरू होगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे वे अपनी पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल के नए सदस्यों के नाम और विभागों के बंटवारे पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
तीन महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकें
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री तीन महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों की अध्यक्षता करेंगे:
- राज्य के शीर्ष नौकरशाहों के साथ बैठक, जिसमें मुख्य सचिव और विभागीय सचिव शामिल होंगे।
- सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक।
- वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक, जिसमें कोलकाता पुलिस आयुक्त, अन्य पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षक शामिल रहेंगे।
शुभेंदु अधिकारी का प्रशासनिक दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी सरकार सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत पर काम करेगी। उन्होंने कहा है कि उनका प्रशासनिक मॉडल पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अलग होगा। इसमें निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे और संगठन तथा प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा।

