जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले में सोमवार को एक नया मोड़ सामने आया। कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
अदालत ने कहा कि कोर्ट में पहले से कई मामलों की अधिकता है और यह केस ऐसी बेंच के सामने जाना चाहिए जो इसे पर्याप्त समय दे सके, ताकि न्यायहित में बेहतर सुनवाई हो सके।
सीबीआई ने सौंपी स्टेटस रिपोर्ट
मामले की जांच कर रही सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। पिछली सुनवाई में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर सीबीआई किसी भी आरोपी या संदिग्ध से पूछताछ कर सकती है और जांच एजेंसी पूरी तरह स्वतंत्र है।
बेंच बदलने की प्रक्रिया पहले भी हुई
यह पहली बार नहीं है जब इस केस में बेंच बदली गई हो। मार्च 2025 में भी जस्टिस देबांग्शु बसाक की बेंच ने समय की कमी का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
अगस्त 2024 में सामने आया था मामला
यह मामला 9 अगस्त 2024 को सामने आया था, जब अस्पताल परिसर में महिला डॉक्टर का शव मिला था। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अगले ही दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
लंबी जांच के बाद 18 जनवरी 2025 को सियालदह कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया और 20 जनवरी 2025 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल
पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, अलग-अलग बेंचों के खुद को अलग करने और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई के कारण मामला लगातार लंबित रहा।
देशभर में चर्चा का विषय
यह केस शुरू से ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। डॉक्टर संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब बेंच के अलग होने के बाद यह देखना अहम होगा कि अगली सुनवाई किस न्यायपीठ के सामने होती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

