Wednesday, September 9, 2026
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CBSE का नया तीन-भाषा फॉर्मूला, 2026-27 से बदलेंगे नियम, जानिए किस कक्षा पर क्या होगा असर

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना, छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना और भाषा सीखने को अधिक प्रभावी बनाना है।

क्या है तीन-भाषा फॉर्मूला?

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।

मुख्य नियम इस प्रकार हैं—

  • तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा।
  • तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश या अन्य विदेशी भाषा तभी चुनी जा सकेगी, जब बाकी दोनों भाषाएं भारतीय हों।
  • भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, उड़िया, असमिया समेत संविधान की मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाएं शामिल हैं।

किस कक्षा पर क्या होगा असर?

10वीं के छात्र (सत्र 2026-27)

इस सत्र में 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों पर नए नियम लागू नहीं होंगे। वे मौजूदा दो-भाषा व्यवस्था के तहत ही पढ़ाई और परीक्षा देंगे।

9वीं के छात्र (सत्र 2026-27)

इन छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के माध्यम से होगा।

यदि कोई छात्र इस मूल्यांकन में सफल नहीं होता है, तब भी उसे 10वीं में प्रोन्नत किया जाएगा। हालांकि, 10वीं का सीबीएसई पास प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उसे 9वीं की तीसरी भाषा का मूल्यांकन पास करना अनिवार्य होगा। तीसरी भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

7वीं और 8वीं के छात्र

जब ये छात्र 9वीं और 10वीं में पहुंचेंगे, तब इन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। यदि कोई छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहा है, तो उसे एक अतिरिक्त भारतीय भाषा शामिल करनी होगी। इनका मूल्यांकन भी केवल स्कूल स्तर पर होगा।

6वीं के छात्र

2026-27 से कक्षा 6 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए तीन-भाषा फॉर्मूला लागू होगा। जब यह बैच 10वीं में पहुंचेगा, तब तीसरी भाषा के लिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

6वीं से लागू होगी नई व्यवस्था

सीबीएसई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 2026-27 से कक्षा 6 के सभी छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इनमें दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी रहेगा।

जो छात्र पहले से अंग्रेजी के साथ कोई विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं, वे उसे जारी रख सकेंगे, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।

अब तक अधिकांश छात्र 8वीं के बाद तीसरी भाषा छोड़ देते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत 9वीं और 10वीं तक तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रखनी होगी।

किन्हें मिलेगी छूट?

  • सीबीएसई ने कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का भी प्रावधान किया है।
  • दिव्यांग (CwSN) छात्रों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार आवश्यक रियायतें मिलेंगी।
  • विदेशों में संचालित सीबीएसई स्कूलों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा पढ़ाने की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
  • विदेश से भारत आने वाले विदेशी छात्रों को भी भारतीय भाषा पढ़ने से राहत मिलेगी।
  • यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो वह 9वीं में अपनी पहले से पढ़ी जा रही तीसरी भाषा जारी रख सकेगा। ऐसे मामलों में स्कूलों को आवश्यक व्यवस्था करनी होगी।

स्कूलों को कैसे मिलेगी मदद?

नई व्यवस्था लागू करने के लिए सीबीएसई और एनसीईआरटी स्कूलों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।

एनसीईआरटी संविधान की 22 भारतीय भाषाओं में कक्षा 6 के लिए नई पाठ्यपुस्तकें तैयार कर रहा है।

कक्षा 9 की तीसरी भाषा के मूल्यांकन संबंधी दिशा-निर्देश सीबीएसई की शैक्षणिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए स्कूल योग्य मौजूदा शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, सहोदय क्लस्टर के माध्यम से साझा शिक्षकों तथा ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण का सहारा ले सकेंगे।
अदालत में पहुंचा मामला

तीन-भाषा फॉर्मूले को लेकर अदालत में याचिका भी दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 9वीं में तीसरी भाषा लागू करने की समयसीमा 2029-30 तक बढ़ाई जाए, जैसा पहले प्रस्तावित था।

वहीं, केंद्र सरकार ने अदालत में कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने का अधिकार केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों के पास है। सरकार का कहना है कि इस नीति से छात्रों में बहुभाषी क्षमता विकसित होगी, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा और सांस्कृतिक विविधता को मजबूती मिलेगी।

क्यों अहम है यह फैसला?

सीबीएसई की नई व्यवस्था के तहत पहली बार तीसरी भाषा को 10वीं के पास प्रमाणपत्र से जोड़ा गया है। हालांकि तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल स्तर पर होने वाले मूल्यांकन में सफल होना अनिवार्य रहेगा। इसके बिना छात्र को 10वीं का पास प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।

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