जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। वांगचुक 28 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों सरकारों से इस मामले में कल तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
अस्पताल में भर्ती कराने और फोर्स-फीडिंग की मांग
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की है। याचिका में अदालत से केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए और यदि उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक हो तो उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए।
18 दिन से जारी है अनशन
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। बताया जा रहा है कि उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, मांसपेशियों में दर्द की शिकायत है और उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थकों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन उन्होंने फिलहाल अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
संसद तक मार्च की घोषणा
इस बीच, सीजेपी ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना हैं।

