- ड्रग, जीएसटी अधिकारी बेखबर, दवा सप्लाई की आड़ में फल-फूल रहा नकली दवाओं का गोरखधंधा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिले भर में तमाम दवा कंपनियां दिन के उजाले में खुलआम सरकार को राजस्व का चूना लगा रही हैं, लेकिन ड्रग व जीएसटी अफसर इससे पूरी तरह से बेखबर हैं। ऐसा करने वाली दवा कंपनियां केवल सरकार को ही राजस्व का चूना नहीं लगा रही हैं बल्कि इनकी कारगुजारियों के चलते दवा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर्स व सोल ऐजेंट का भी काम धंधा बुूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
अकेले खैर नगर की दवा मार्केट को हर माह करोड़ों का फटका लगा रहा है। शहर ही नहीं बल्कि दूर दराज के देहात के इलाकों में प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों तक अपनी पैठ के नाम पर कुछ दवा कंपनियां करीब दो साल से ऐसी कारगुजारियां दिखा रही हैं। सैंपल की दवाएं लेकर जाने वाले मेडिकल रैप की आड़ में ऐसी दवा कंपनियों ने अब अपने मेडिकल रैप को मेडिसिन सप्लायर या डिलीवरी बॉय बना दिया है। उनके जरिये दवाओं की खेप सीधे सप्लाई की जा रही है।
डूबा खैर नगर का कारोबार
इस प्रकार की कंपनियों की कारगुजारियों के चलते खैरनगर की दवा मार्केट का कारोबार डूब गया है। खैर नगर के जिन डिस्ट्रीब्यूटर्स को पहले पल भर की फुर्सत नहीं होती थी उनका पूरा दिन अब ग्राहकों के इंतजार में कटता है। काम धंधा पूरी तरह से ठप हो चुका है। यह स्थिति तो तब है जब महामारी काल है तथा वर्तमान के तीन माह बीमारियों की लिहाज सो सीजन माने जाते हैं। सीजन होते हुए भी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर काम नहीं है। उन्हें ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है।
नकली दवाओं की खेप
सीधे दवाओं की सप्लाई की आड़ में नकली या फिर कहें लोकल मेक दवाओं का धंधा फलने फूलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, जो लोग सीधे दवाओं की सप्लाई के धंधे में लगे हैं वो अवैध रूप से यह काम कर रहे हैं। दो नंबर का काम होने की वजह से इसकी कोई वैध लिखा पढ़ी नहीं होती। जो दवाएं सीधे सप्लाई की जा रही हैं उनसे यदि कोई साइड इफेक्ट हो जाए तो भी कानूनी कार्रवाई के कोई विकल्प नहीं रह जाते हैं।
बहती गंगा में लगा रह गोते
कंपनी से सीधे दवाओं की सप्लाई होने की वजह से दवाएं सस्ती मिल जाती हैं हालांकि इस सबसे सरकार को राजस्व को बड़ा नुकसान होता है। सस्ती दवाओं के चक्कर में देहात ही नहीं बल्कि शहर क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सक, नर्सिंग होम संचालक तथा गांव देहात के चिकित्सक इसी प्रकार के सप्लायरों से दवाएं लेते हैं।
अफसर बेखबर
इस प्रकार से दवाओं की सप्लाई करने वालों तथा दवा कंपनियों की कारगुजारियों से ड्रग कंट्रोलर व जीएसटी विभाग के अफसर भी पूरी तरह से बेखबर हैं। दोनों ही विभागों की इस प्रकार से अवैध रूप से दवा सप्लाई करने वालों पर नजर नहीं है। इससे सरकार को राजस्व का चूना ही नहीं लगा रहा, बल्कि खैर नगर की दवा कारोबार को कारोबार भी रसातल में जा पहुंचा है।
ये कहना है एडीसी का
एडिशनल ड्रग कंट्रोलर वीरेन्द्र कुमार का कहना है कि इस संबंध में कोई सूचना मिलेगी तो जरूर कार्रवाई की जाएगी। इसको दिखवाया जाएगा।

