Sunday, March 15, 2026
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अवैध होर्डिंग पर कसेगी नकेल, अब होगी टैगिंग

  • संबंधित विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ दर्ज करायी जा सकती है एफआईआर
  • नगर निगम कर्मियों में मचा हड़कंप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में अब अवैध होर्डिग पर नगरायुक्त नकेल कसेंगे। इसकी तैयारी कर ली है। नगरायुक्त मनीष बंसल ने स्पष्ट किया कि अवैध विज्ञापन होर्डिंग पर अंकुश लगाया जाएगा। ऐसे होर्डिंग शहर से उतारे जाएंगे तथा संबंधित विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करायी जा सकती है। इसके लिए नगरायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को मीटिंग कर दिशा-निर्देष दिये हैं। उनकी इस सख्ती से नगर निगम में हड़कंप मच गया तथा होर्डिंग का अवैध कारोबार करने वालों को भी नगरायुक्त के इस रुख से परेशानी होगी।

दरअसल, शहर में व्यापक स्तर पर होर्डिंग लगाये गए हैं। अब इसमें यह पता ही नहीं चलता कि कौन से होर्डिंग सही है तथा कौन से होर्डिंग गलत लगाये गए हैं। इसकी पहले छानबीन नगर निगम कर्मचारियों की टीम करेगी, फिर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगरायुक्त मनीष बंसल के आदेश पर शहर की समस्त वैध विज्ञापन स्ट्रक्चर्ज पर अब टैगिंग करना आवश्यक होगा।

इससे अवैध विज्ञापन होर्डिंग पर अंकुश लगेगा। समस्त आनधिकृत होर्डिंग को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। मेरठ नगर निगम की पहल से शहर को अवैध होर्डिंग से निजात मिलेगी और निगम की आय भी बढ़ेगी।

हाईकोर्ट की फटकार: 23 संविदा कर्मियों के मामले हो निस्तारित

23 संविदा कर्मियों की भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट में संविदा कर्मियों की भर्ती को लेकर याचिका दायर की थी, जिस पर गुरुवार को सुनवाई की गई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि संविदा कर्मियों की भर्ती को लेकर जो विवाद बना है, पहले उसे निस्तारित करें तथा उसके बाद रिक्त पदों पर भर्ती की जाए। हाईकोर्ट की फटकार के बाद नगर निगम अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि नगर निगम भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए तथा नियमों के अनुसार नियमित रिक्तियों को शीघ्र भरे। इसके लिए प्रतिवादी ने एक शपथ पत्र नगर निगम को भी दिया गया। हलफनामा व दस्तावेजों के साथ कहा गया कि 854 स्वीकृत पद बताये गए हैं। 637 नियमित कर्मचारियों का काम करना बताया गया। 217 पद खाली बताये गए हैं। यह भी कहा गया है कि संविदा के आधार पर कोई व्यक्ति नहीं या इसके बाद के पदों के खिलाफ काम कर रहा है।

अब तक के पत्र के तहत नियमितीकरण का मुद्दा आठ सितंबर 2010 में की गई याचिका के अनुसार प्रदेश सरकार ने किसी व्यक्ति को सेवा में नियमित नहीं किया गया। सुनवाई करते हुए कहा गया है कि नियमित किये गए कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई यथा शीघ्र नगर निगम निस्तारित करें। लंबे समय से संविदा कर्मियों का विवाद चला आ रहा है। इसका कोई निस्तारण नहीं हो पा रहा है। आखिर नियमित किये गए संविदा कर्मियों पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी, जिसको हाईकोर्ट ने सुनवाई कर नगर निगम अफसरों को दिशा-निर्देश देते हुए खारिज कर दिया है।

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