Wednesday, March 18, 2026
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बच्चों के लिए अलग कमरा भी जरूरी है


रूबी 

बच्चे आईने में स्वयं को देखना भी पसंद करते हैं। उसके लिए आप दीवार में ही आईना लगवाएं। इसके अतिरिक्त कमरे से लगा बाथरूम है तो उसकी नियमित रूप से साफ सफाई आवश्यक है। टूथपेस्ट, ब्रुश, कंघी, साफ तौलिया, साबुन शैम्पू आदि आवश्यक सामग्री रखें। गीजर आदि का प्रबंध न करें। गरम पानी की व्यवस्था  बाहर से करें तो अच्छा होगा।
आपके कमरे की तरह बच्चों के कमरे भी अलग होने चाहिएं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बच्चे अपना अलग कमरा पा कर उसे अपनी इच्छानुरूप सजाते हैं। बच्चों का निजी कमरा उनके व्यक्तित्व में कई सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उनके स्वास्थ्य, उनके व्यक्तित्व, उनकी पसंद उनके कमरे से ही झलकने लगती है। माता पिता का यह सोचना गलत है कि अलग कमरे में रह कर बच्चों को डर लगता है या कमरों में गंदगी बढ़ा देते हैं। इसलिए अधिकतर अभिभावक बच्चों को अपने कमरे में ही रखते हैं। अभिभावकों का यह कर्तव्य बनता है कि बच्चे की अंदर की छिपी विशेषताओं एवं योग्यताओं को प्रकट करने में उनकी सहायता करें।
आरंभ में आप बच्चों को स्वयं कमरा सजा कर दें। कुछ बच्चे खिलौनों से भरा कमरा पसंद करते हैं। कुछ बच्चों को फूलों से भरा कमरा अच्छा लगता है। उनकी पसंद के रंगों को ध्यान में रखते हुए कमरों में रंग करें। बच्चों के कमरे को उनकी उम्र, पसंद, क्लास और रूचि के अनुसार ही ढालें। बच्चा एक है तो सिंगल बेड लगाएं। चादर कार्टून वाली फूलदार हो तो आकर्षक लगती है। आजकल बेडकवर फल वाले भी काफी चले हैं। वह भी ला सकती हैं। बेड कवर हर सप्ताह बदलती रहें।
दीवारों में थोड़े नीचे शेल्फ बनाए ताकि बच्चों को अपना सामान रखने में आसानी हो। उन्हें उन शेल्फ में किताब, खिलौने व कॉमिक्स रखना सिखाएं। पढ़ने के लिए एक टेबल दें। उसके पास एक कूड़ेदान रखें। कूड़ेदान के महत्व से अवगत कराएं। बच्चों के कमरे में टेबल लैम्प न देकर ट्यूबलाइट की रोशनी का प्रबंध करें तो बेहतर है। अधिक तेज रोशनी या अति मंद रोशनी का प्रबंध न करें। दीवार पर बड़ी-घड़ी लगाएं जिससे उन्हें बड़े अक्षरों में साफ-साफ दिखाई दे।
इसके साथ ही आवश्यकतानुसार एक अलमारी दें। हैंगर में कपड़े कैसे व्यवस्थित रूप से रखे जाते हैं, सिखलाएं। बच्चों के कमरे में जितना आवश्यक फर्नीचर है-उनमें पलंग, टेबल कुर्सी अलमारी ही उचित है। व्यर्थ की भरमार से बच्चों को खेलने में असुविधा होगी। बच्चे ज्यादातर फर्श पर ही खेलते हैं, अत: कालीन बिछाना भी आवश्यक है। बजट अनुसार हल्का या भारी कालीन ले सकती हैं। बच्चों के पास खिलौने अधिक हैं तो एक शैल्फ खिलौने या एक बास्केट खिलौने की अवश्य दें। खेलने के बाद खिलौनों को ठीक से उचित स्थान पर रखने से भी अवगत करवाएं।
इन सभी बातों के अतिरिक्त कुछ आवश्यक बातों को अवश्य ध्यान में रखें। बच्चे अधिक छोटे हैं तो अनावश्यक प्लग व स्विच में टेप लगा दें। कमरे की चिटखनी ऊंचे स्थान पर लगाएं ताकि गलती से बच्चे अपने आप को कमरे में बंद न करें।
बच्चे आईने में स्वयं को देखना भी पसंद करते हैं। उसके लिए आप दीवार में ही आईना लगवाएं। इसके अतिरिक्त कमरे से लगा बाथरूम है तो उसकी नियमित रूप से साफ सफाई आवश्यक है। टुथपेस्ट, ब्रुश, कंघी, साफ तौलिया, साबुन शैम्पू आदि आवश्यक सामग्री रखें। गीजर आदि का प्रबंध न करें। गरम पानी की व्यवस्था  बाहर से करें तो अच्छा होगा।
कुछ ही दिनों के पश्चात आप देखेंगे कि आपका बच्चा अपने कमरे की सफाई से लेकर उसे रचनात्मक ढंग से सजाने का प्रयत्न कर रहा है। यह अवश्य ध्यान रखें कि बच्चा बीमार है या अकेले रहने की इच्छा नहीं कर रहा है, किसी प्रकार के भय से आतंकित है तो ऐसी अवस्था में उसे अकेला न रहने दें। स्वस्थ होने के बाद ही उसे उसके कमरे में सुलाएं।

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