- मायापुर-रूपपुर में धारा-132 की जमीन पर लगाए जा रहे क्रशर
- शिकायतकर्ता ने जांच टीम पर जताया संदेह, मामाला सुर्खियों में
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: बेहट तहसील के मिर्जापुर क्षेत्र के ग्राम मायापुर-रूपपुर में ग्राम समाज की-132 की जमीन पर नियम विरुद्ध खनन के लिए आवंटित पट्टों और अवैध तरीके से स्टोन क्रशर लगाने का मामला तूल पकड़ चुका है। दिलचस्प ये है कि इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। चूंकि आरोपी लेखपाल और खनन माफियाओं की मिली भगत से हुए इस खेल की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक से की गई है।
इसलिए यह मामला चर्चाओं में है। यही नहीं, शिकायतकर्ता ने अब मंडलायुक्त के यहां प्रार्थना-पत्र देकर गुहार लगाई है और कहा है कि इस मामले की जांच मंडल स्तर की टीम से कराई जाए। इसलिए कि जिला प्रशासन ने जो जांच टीम बनाई है, उस पर शिकायतकर्ता को संदेह है। दरअसल, आरोपी अफसरों को ही जांच का जिम्मा दे दिया गया है।
यह बताने की जरूरत नहीं कि बेहट और मिर्जापुर तथा सरसावा में यमुना का किनारा अपनी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अवैध खनन के लिए जाना जाता रहा है। खनन माफिया चाहे हरियाणा के हों या फिर यूपी के, यहां अपनी दाल गलाते रहे हैं।
वैसे तो जिला प्रशासन ने अवैध खनन पर सख्ती कर रखी है लेकिन बेहट तहसील क्षेत्र में इन दिनों नया खेल शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक मिजार्पुर कस्बे के गांव मायापुर-रूपपुर में ग्राम समाज की जमीन पर खनन माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा कर नियमों के विरुद्ध क्रशर लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इसको लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इसी गांव के प्रधान के प्रतिनिधि इखलाक ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की थी। कहा था कि 132-की जमीन पर पट्टे नियमविरुद्ध दिए गए हैं। पीड़ित शिकायतकर्ता ने न्याय की गुहार लगाई थी।
मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में प्रधान प्रतिनिधि ने यह भी कहा था कि उसके ही गांव के हल्के का लेखपाल पंकज चौहान ग्राम समाज की जमीन जिसका-नंबर 310 है, यह जमीन धारा-132 की है। इस जमीन पर विभाग के उच्चाधिकारियों से सांठगांठ कर खनन माफिया काबिज हो रहे हैं। ग्राम समाज की इसी जमीन पर क्रशर लगाया जा रहा है जो कि नियमों के विरुद्ध है।
शिकायतकर्ता ने इस मामले से जिलाधिकारी को अखिलेश सिंह को भी अवगत कराया था। आखिरकार, उन्होंने उन्हीं अधिकारी व लेखपाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया, जिन पर शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी साठगांठ से यह पूरे खेल हुआ है। दरअसल, इस मामले में जांच के लिए बेहट के एसडीएम और तहसीलदार नामित किया गय है। जबकि इन दोनों अधिकारियों की बिना मर्जी के पट्टा आवंटित नहीं हो सकता।
हालांकि, 132 की जमीन पर पट्टाआवंटन नियम विरुद्ध है। वह अलॉट नहीं किया जा सकता। बहरहाल, अब शिकायतकर्ता इखलाक ने मंडलायुक्त एवी राजमौलि के यहां प्रार्थना-पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। कहा है कि इस मामले की जांच मंडल स्तर की टीम से कराई जाए अन्यथा की स्थिति में उसे न्याय नहीं मिलेगा। फिलहाल, मंडलायुक्त ने इस मामले का संज्ञान लिया है। माना जा रहा है कि जांच में दूध का दूध और पानी का पानीहोगी। यानि कि गलत तरीके से आवंटित पट्टे निरस्त होंगे।

