- उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे कराए जाने के मामले में विधायिका के विलंब के चलते होगा ऐसा
- देश की 55 छावनियों का कार्यकाल माह फरवरी में हो रहा पूरा
- मेरठ समेत बाकी अन्य छावनियों को भी इनके साथ ही किया जा सकता है भंग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड के चुनाव होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं फरवरी माह में कैंट बोर्ड के भंग होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। देश के 55 कैंट बोर्ड का कार्यकाल फरवरी माह में पूरा होने जा रहा है। विधायिका स्तर पर तकनीकि देरी के चलते वहां चुनाव नहीं होने जा रहे हैं।
जिसकी वजह से कैंट बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो जाएगा उन्हें भंग कर दिया जाएगा। उनके साथ ही मेरठ समेत बाकी कैंट बोर्ड भी भंग होने तय माने जा रहे हैं। बोर्ड भंग होने की आहट से चुनावी तैयारी करने वालों के पसीने छूट रहे हैं।
जुलाई माह तक एक्सटेंशन
हालांकि मेरठ समेत जिन अन्य कैंट बोर्ड को जुलाई माह तक का एक्सटेंशन दिया गया है, उनके फरवरी माह में भंग किए जाने की बात कही जा रही है। मेरठ कैंट बोर्ड को दो बार छह-छह माह का एक्सटेंशन दिया जा चुका है। वर्तमान में एक्सटेंशन पार्ट टू चल रहा है।
यह जुलाई माह में पूरा होना है। लेकिन जो आसार नजर आ रहे हैं उनके चलते कहा जा रहा है कि जुलाई के एक्सटेंशन की अवधि के पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। उससे पहले ही बोर्ड के सदस्यों को घर बैठा दिया जाएगा।
धरी रह गई चुनावी तैयारीं
कैंट बोर्ड भंग किए जाने की अटकलों के बीच चुनावी तैयारियों को जोरदार झटका लगा है। कैंट बोर्ड के सभी आठ वार्डों के अलावा करीब दर्जन भर ऐसे दिग्गज उम्मीदवार भी हैं जो उपाध्यक्ष के चुनाव की तैयारी कर रहे थे।
पहले उम्मीद की जा रही थी कि जुलाई माह में एक्सटेंशन की अवधि के पूरा होने से पहले ही अन्य कैंट बोर्ड के साथ मेरठ कैंट बोर्ड के भी चुनाव करा दिए जाएंगे, लेकिन जानकारों की मानें तो अब ऐसा नहीं होने जा रहा है।
इसके चलते तमाम चुनावी तैयारियों को झटका लगा है। सबसे बड़ा झटका उन्हें लगा है जिन्होंने टिकट के लिए सब कुछ दांव पर लगाया हुआ है। इतना ही नहीं टिकट न मिलने की स्थिति में दूसरे विकल्प भी खुले रखे हैं।
वर्तमान में से किसी को मौका नहीं
कैंट बोर्ड भंग होने की स्थिति में बोर्ड के वर्तमान निर्वाचित किसी भी सदस्य को कैंट बोर्ड के भंग होने के बाद बनने अध्यक्ष व सीईओ वाली कमेटी का हिस्सा बनने का मौका नहीं मिलने जा रहा है। कैंट ऐक्ट के प्रावधानों के अनुसार अध्यक्ष व सीईओ वाली कमेटी में जनता के प्रतिनिधि के तौर पर जो एक शख्स शामिल किया जाता है वह वर्तमान बोर्ड का सदस्य नहीं होता है। ऐसे में उसी की लाटरी निकलेगी जो कैंट अफसरों या फिर सत्ता करीबी होगा।
देरी के हैं तकनीकी कारण
कैंट बोर्ड के चुनाव में देरी होने के कई तकनीकि कारण हैं। इसका मुख्य कारण उपाध्यक्ष का चुनाव बजाय जीतकर आने वाले सदस्यों के बीच से कराकर इस बार सीधे जनता द्वारा कराए जाने का मंत्रालय का फैसला है। इस फैसले को अमली जामा पहनाने में लग रही देरी के एक कारण सरकार के इस आदेश का नोटिफिकेशन में देरी होना है। अभी यह प्रस्ताव कैबिनेट से पास होगा।
उसके बाद लोकसभा व फिर राज्यसभा में पास होना। यदि कोई तकनीकि अड़चन किसी सदन में आती है तो इसको सलेक्ट कमेटी के पास भी भेजा जा सकता है। आखिर में जब राष्ट्रपति इसका अनुमोदन कर देंगे तब कहीं जाकर सरकार की ओर से गजट होगा। गजट के बाद चुनाव की तारीख पर राय मांगी जाएगी। तब कहीं जाकर चुनाव होंगे। ये एक लंबी प्रक्रिया है और हो सकता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव तक भी इसको टाल दिया जाए। यदि ऐसा हुआ तो चुनाव की तैयारियों में लगने संभावित प्रत्याशियों के लिए यह बड़ा झटका होगा।
श्रेय लेकर भाजपाइयों ने मनाया जश्न, विधायक का स्वागत
कैंट बोर्ड के व्हिकल एंट्री ठेके के दो प्वाइंट बंद कराए जाने पर भाजपाइयों ने शुक्रवार को कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, बोर्ड के सदस्य अनिल जैन, नीरज राठौर व धर्मेंद्र सोनकर का स्वागत किया। कैंप कार्यालय जुटे भाजपाइयों ने विधायक व बोर्ड के सदस्यों को फूल मालाओं से लाद दिया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा के कार्यकर्ताओं की जीत है। टोल जो प्वाइंट बंद किए गए हैं, उनकी वजह से आम पब्लिक को बड़ी राहत मिली है।
पब्लिक चाहती थी कि तीन टोल नॉके बंद कराए जाएं। जो नया ठेका टोल वसूली के लिए दिया जाए उसमें मवाना रोड डेयरी फार्म के समीप स्थित टोल प्वाइंट को भी बाहर किया जाना चाहिए। क्योंकि वो जगह पीडब्ल्यूडी की है, जहां अवैध रूप से टोल वसूली की जा रही है। कार्यकर्ताओं ने इसके लिए लिए कैंट विधायक व बोर्ड सदस्यों का आभार जताया।
विरोध तो बहाना है, पहले से तय था दो टोल बंद होना
कैंट विधायक और बोर्ड के सदस्यों के विरोध की बात तो बहाना भर है, दरअसल दो टोल नॉके दिल्ली रोड व रुड़की रोड को हटाए जाने की बात तो कैंट बोर्ड प्रशासन ने पहले ही सिद्धांतिक तौर पर मान ली थी। ऐसा करने के पीछे मुख्य वजह रैपिड रेल का कार्य बताया जाता है। दिल्ली रोड और रुड़की रोड दोनों ही जगह इन दिनों रैपिड रेल के लिए काम करने वाली कंपनी के अधिकारी पिछले दिनों कैंट बोर्ड प्रशासन से मिले थे।
उसके बाद कैंट अफसरों ने कैंट क्षेत्र में जहां-जहां इसको लेकर बाधाएं हैं, उनको हटाने का काम शुरू कर दिया। इसकी शुरूआत लालकुर्ती के गडढ़ा मार्केट के दुकानदारों से की गई। जिन्हें अब होटल अमृत आबूलेन के पीछे बनाए गए फड़ों पर शिफ्ट किया जा रहा है। इसी तर्ज पर बेगमपुल स्थित बंगला नंबर-80 में रहने वाले 17 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें इस नोटिस का उत्तर 25 जनवरी तक देना हैं।
हालांकि जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं वो लगातार डीईओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने नोटिस का उत्तर तैयार कर लिया है, लेकिन आरोप है कि डीईओ कार्यालय का स्टाफ नोटिस का जवाब लेने में आनाकानी कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर रैपिड रेल कार्य के चलते ही कैंट प्रशासन ने दिल्ली रोड फैज-ए-आम कालेज के सामने वाले तथा रुड़की रोड पर लेखानगर टोल प्वाइंट को भी हटाने का मन पहले ही बना लिया है।
हालांकि ये बात अलग है कि इसको लेकर कैंट विधायक खेमा श्रेय ले रहा है। जानकारों का कहना है कि सबसे ज्यादा विरोध जिन टोल नॉकों पर था उसमें मवाना रोड व दिल्ली रोड शामिल थे। यदि खत्म कराना था तो मवाना रोड खत्म कराया जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जानकारों का कहना कि केवल वो दो टोल प्वांइट खत्म किए गए हैं। जिनका आग्रह रैपिड रेल का कार्य करने वाली कंपनी ने किया था। जिसके लिए पहले से कैंट बोर्ड प्रशासन ने मन बना लिया था।
शीघ्र ही नहीं रुकेगा खंदक बाजार में सीवरेज का कार्य
कोतवाली के खंदक बाजार इलाके में जल निगम के चीफ इंजीनियर ने ठेकेदार को त्वरित गति से कार्य निपटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खंदक बाजार इलाके में सड़क को नए सिरे से बनाने का काम भी सोमवार से शुरू हो जाएगा। दरअसल, खंदक बाजार में पाइप लाइन के कार्य की वजह से पिछले कई माह से खद्दर मंडी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
कारोबारियों के लाखों रुपये के आर्डर देशभर के कोने-कोने में जाते हैं। वह नहीं जा पा रहे हैं। मामले को लेकर शुक्रवार को मार्केट के महामंत्री अंकुर गोयल पूर्व प्रधान नवीन अरोड़ा समेत दर्जनों व्यापारी नेता सांसद राजेंद्र अग्रवाल के प्रतिनिधि हर्ष गोयल से मिले। हर्ष गोयल ने इस मामले को सिंचाई विभाग व प्रशासन के आला अधिकारियों के समक्ष उठाया उसके बाद सिंचाई विभाग के इंजीनियर का फोन अंकुर गोयल के पास पहुंचा। उन्होंने शीघ्र ही काम पूरा करा दिए जाने का भरोसा दिलाया।

