- लगभग तीन मिनट पूरी टीम के सामने रहा तेंदुआ एक्सपर्ट का दावा जल्द पकड़ा जाएगा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/किठौर: तेंदुआ सर्च आॅपरेशन में नाकाम वन विभाग की टीम ने एक सप्ताह बाद वाइल्ड लाइफ केयर एक्सपर्ट टीम से सहयोग मांगा है। शुक्रवार डीएफओ वाइल्ड लाइफ टीम को पुन: लेकर मौके पर पहुंचे और तेंदुआ परिवार की पुरानी और नई दोनों लोकेशनों का मुआयना कराया।
एक्सपर्ट ने नई लोकेशन पर तेंदुए की मौजूदगी का दावा करते हुए गाजियाबाद से मंगाए गए पिंजरें को वहां लगाने की सलाह दी। कुछ देर बाद टीम पिंजरा लेकर नई लोकेशन पर पहुंची तो एक तेंदुआ रेत के टीले पर बैठा दिखा। जो दो-तीन मिनट पूरी टीम की आंखों के सामने रहा फिर सरसों के खेत में घुस गया।
फतेहपुर-भड़ौली के जंगल में स्कैप के पास तेंदुआ दिखने के बाद सप्ताह भर पूर्व शुरु हुआ सर्च आॅपेरशन नित नए फेरबदल के साथ चल रहा है, लेकिन चतुर तेंदुआ परिवार वन विभाग के शिकंजे में आने को तैयार नही।
बल्कि तेंदुआ परिवार ने अपना ठिकाना तक बदल दिया है। गुरुवार को तेंदुआ परिवार भड़ौली के ग्रामीणों को असीलपुर बाइपास पर जड़ौदा के जंगल में रेत के टीले पर दिखा। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वनाधिकारियों को दी। वनाधिकारियों को लगभग 36 घंटे से तेंदुआ परिवार पुरानी लोकेशन के इर्द-गिर्द नजर नही आ रहा था।

नई लोकेशन का पता चलते ही सर्च आॅपरेशन में मुस्तैद टीम ने उच्चाधिकारियों से वार्ता की। जिसके बाद शुक्रवार को डीएफओ राजेश कुमार वाइल्ड लाईफ केयर एक्सपर्ट जीएस खुशारिया की टीम को पुन: लेकर फतेहपुर पहुंचे। सर्वप्रथम डीएफओ ने वाइल्ड लाईफ केयर एक्सपर्ट टीम को तेंदुआ परिवार की पुरानी और नई लोकेशन एरिया का मुआयना कराया।
जीएस खुशारिया ने तुरंत नई लोकेशन पर पिंजरा लगाने के निर्देश दिए। वनटीम गाजियाबाद से मंगाया गया पिंजरा लेकर तेंदुए की नई लोकेशन पर पहुंची तो तेंदुआ टीले पर बैठा हुआ था। जो टीम को देखते ही धीरे-धीरे लगभग 100 मीटर चलकर सरसों के खेत में घुस गया। यह देख जीएस खुशारिया ने सरसों के बगल में स्थित ईंख में पिंजरा लगवा दिया। क्योंकि तेंदुआ शेह का श्किार कर रहा है इसलिए पिंजरे में मुर्गे रखवाए गए हैं। बता दें कि रेत के जिस टीले पर तेंदुआ बैठा था वहां भी शेह के दो बड़े बिल हैं।
ग्रामीणों को समझाया फिर पिंजरा लगाया
शुक्रवार को तेंदुआ सर्च आॅपरेशन शुरु करने से पूर्व वन विभाग की टीम ने पुरानी लोकेशन वाले गांव फतेहपुर के ग्रामीणों को बुलाकर पूरा मामला समझाया बताया कि तेंदुआ अब यहां से पलायन कर दो किमी दूर जड़ौदा के जंगल में पहुंच गया है। इसलिए हम उसके पीछे यहां से पिंजरा उठाकर वहीं लगाने जा रहे हैं।
इस पर ग्रामीणों ने कहा कि यदि तेंदुआ परिवार यहां से दो किमी अलग है तो वहां से पकड़ लिया जाए। आमजन का उद्देश्य तेंदुआ परिवार पकड़े जाने से है। यह फैसला टीम ने कई दिनों से चल रहे ग्रामीणों के रोष को देखते हुए लिया।
जड़ौदा के जंगल में ही जन्मे हैं तेंदुए
वन टीम को देख मौके पर पहुंचे भड़ौली के प्रधान दयाचंद, ग्रामींण बबलू, रामकेश आदि ने बताया कि जिस टीले पर तेंदुआ दिखाई दिया है लगभग दो साल पूर्व इसी टीले पर एक मादा तेंदुए ने दो शावकों को जन्म दिया और यह शावक यहीं पर पले बढ़े हैं। इससे पूर्व एक्सपर्ट जीएस खुशारिया दावा कर चुके थे कि यहां तेंदुए दो से अधिक हैं।
नाकामी पर याद आए एक्सपर्ट
वैसे तो वाइल्ड लाइफ केयर एक्सपर्ट को चार दिन पूर्व डीएफओ उस वक्त लेकर पहुंचे थे जब तेंदुआ पिंजरें में बैठकर भी निकल गया था। उस दिन भी एक्सपर्ट ने तीन तेंदुए गन्ने के खेत में पेड़ के पास देखे थे। एक्सपर्ट ने उस वक्त ही उन्हें पकड़ने का मशवरा दिया, लेकिन वनाधिकारियों ने एक्सपर्ट की बात को तवज्जो न दी। आठ दिन तक नाकाम रहने पर वन अफसरों को एक्सपर्ट की याद आई। एक्सपर्ट ने ग्रामीणों को भी जंगली जानवर खासकर तेंदुआ और टाईगर से बचाव के उपाय बताए।
यूं तो वन विभाग ने पहले से दो पिंजरे फतेहपुर भड़ौली के जंगल में लगा रखे हैं, लेकिन इनमें से एक पिंजरा खराब है। जिस वजह से मेरठ से गाजियाबाद ले जाया गया तीसरा पिंजरा यहां मंगवाया गया था। लेकिन लगाते वक्त यह पिंजरा भी खराब निकला। हालांकि एक्सपर्ट ने मेहनत कर इस पिंजरें को चालू किया। फिर उसके मुंह से यही निकला कि बस क्या पिंजरा है?

