जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पंजाब का बजट आज पेश किया जाएगा। पंजाब विधानसभा में सुबह 11 बजे बजट पेश किया जाएगा। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल विधानसभा के लिए निकल चुके हैं। यह कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस बजट पर सभी की नजरें टिकी हैं।
कई नई योजनाओं का हो सकता है एलान
बजट में शिक्षा, सेहत, बिजली, पानी के आधारभूत मुद्दों पर ध्यान देते हुए कई नई योजनाओं का एलान भी तय है। विपक्ष महंगी बिजली पर सरकार को घेर रहा है। इसे नए बजट में अनदेखा करना आसान नहीं होगा। इसी बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा छठे वेतन आयोग की अवधि 31 मार्च तक बढ़ा दिए जाने के कारण सरकारी कर्मचारी वर्ग में फैली मायूसी को नजरअंदाज कर पाना आसान नहीं होगा।
जनता पर कोई नया बोझ पड़ने की उम्मीद कम
माना जा रहा है कि वित्त मंत्री इस बजट में आम जनता पर कोई नया बोझ डालने से परहेज करेंगे और यह बजट किसानों, खेत मजदूरों, मुलाजिमों और बेरोजगार युवा वर्ग पर केंद्रित होगा क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव में यही वर्ग जीत का रास्ता प्रशस्त करेंगे।
अकाली सदस्य हिरासत में लिए गए
विधानसभा के बाहर रोके जाने पर शिरोमणि अकाली दल के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने बिक्रम मजीठिया समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया।
सरकार के खजाने में आएंगे 30 हजार करोड़
इस साल राज्य सरकार के खजाने में करीब 30 हजार करोड़ रुपये आने का रास्ता साफ हो रहा है। इससे वित्त मंत्री उत्साहित हैं और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जनता के हर वर्ग को प्रत्यक्ष तौर पर लाभ पहुंचाते दिखाई दे सकते हैं।
विधानसभा के बाहर हंगामा
अकाली दल के सदस्यों ने विधानसभा में घुसने का प्रयास किया। रोकने पर अकाली सदस्यों ने हंगामा कर दिया। अकाली सदस्यों को पूरे सत्र के लिए विधानसभा से बाहर किया जा चुका है।
घाटे का ही रहेगा बजट
वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल नए वित्त वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्ताव पेश करेंगे। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार का यह बजट भी घाटे का ही होगा।
पंजाब के वित्तमंत्री सोमवार सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगे। पंजाब की 15वीं विधानसभा का 1 मार्च को शुरू हुआ था। कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार का यह आखिरी पूर्ण बजट है।
मार्च-अप्रैल 2022 में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले यह बजट सत्र सिर्फ राज्य की वित्त व्यवस्था की ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए सत्ताधारी कांग्रेस खुद को अगले चुनाव के लिए जनता के बीच फिर से स्थापित करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी।

