- 12 दिन से हाइवे की एक कालोनी में खड़ी हुई थी
- जीपीआरएस से दिल्ली पुलिस को पता चला, बिना सीनियर अधिकारियों को बताये सौंप दी फार्च्यूनर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्या दूसरे राज्य की चोरी की गाड़ी बिना लिखापढ़ी के सौंपी जा सकती है। अगर नहीं तो हाइवे पर स्थित एक कालोनी में बारह दिनों से लावारिस खड़ी फार्च्यूनर गाड़ी को दिल्ली पुलिस के एक फोन पर कथित मालिक को सौंप दिया गया।
सुभारती चौकी प्रभारी ने इस गाड़ी के बारे में न तो थानेदार और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को बताने की जरूरत समझी। हैरानी की बात यह है कि जीपीआरएस के जरिये दिल्ली पुलिस को पता चला था और मेरठ पुलिस ने इसे बेहद सहजता से लिया और मौके से पकड़े गए एक युवक को भी छोड़ दिया।
हाइवे स्थित एक कालोनी में 12 दिन से फार्च्यूनर संख्या आरजे14यूएल 6789 सफेद रंग खड़ी हुई थी। सोमवार को दो वाहन चोर गाड़ी को ले जाने के लिये गाड़ी साफ करके जैसे ही अंदर बैठे और स्टार्ट करने के लिये चाबी लगाई तभी गाड़ी में लगे जीपीआरएस से दिल्ली पुलिस को पता चल गया।
दिल्ली पुलिस ने सुभारती चौकी पुलिस से संपर्क किया और कहा कि कालोनी में खड़ी गाड़ी को निकलने मत दिया जाए। इस सूचना पर सुभारती चौकी पुलिस मौके पर पहुंची तो दो युवक गाड़ी में मिले। उस वक्त कालोनी के काफी लोग मौजूद हो गए थे।
पुलिस को देखकर एक संदिग्ध युवक दीवार फांद कर फरार हो गया जबकि दूसरे युवक को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस युवक को लेकर चौकी आ गई। शाम सात बजे के करीब दिल्ली से खुद को गाड़ी का मालिक बताने वाले रीतेश गुप्ता ने आकर सुभारती चौकी बात की और दिल्ली पुलिस का मैसेज दिखाया और सुभारती पुलिस ने गाड़ी को ले जाने को कह दिया।
कथित मालिक बाद में गाड़ी लेकर चला गया। जब इस बारे में सुभारती चौकी प्रभारी विनीत कुमार से पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्होंने दिल्ली पुलिस से बात करके गाड़ी हैंडओवर कर दी और जो युवक मौके पर पकड़ा गया था उसका कोई कसूर नहीं था।
हैरानी की बात यह है कि जानी थाना प्रभारी संजय वर्मा देर रात तक यही कहते रहे कि उनके संज्ञान में यह मामला नहीं है। एसपी देहात केशव कुमार का कहना है कि उनकी जानकारी में यह मामला नहीं है और इस बारे में जानकारी ली जाएगी।
अहम् सवाल
- कालोनी के अंदर 12 दिन से खड़ी चोरी की गाड़ी को जानी पुलिस ने अपनी सुपुर्दगी में क्यों नहीं लिया।
- कथित मालिक को गाड़ी सौंपते समय गाड़ी की चेसिस और बॉडी नंबर का मिलान क्यों नहीं किया।
- चौकी प्रभारी ने महंगी गाड़ी के लावारिस मिलने और हैंडओवर करने की जानकारी सीनियर अधिकारियों को नहीं दी।
- क्या जानी थाना प्रभारी को सूचना दिये बिना गाड़ी देना सही था।

