- वन विभाग के आग्रह पर तेंदुए को मारने गए थे रानीखेत के जंगलों में
जनवाणी संवाददाता |
शेरकोट: उत्तराखण्ड में रानीखेत स्थित ग्राम में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को नवाब सादबिन आसिफ के ढ़ेर कर देने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वहीं इस खबर का पता चलते ही उनके शुभचिंतकों एवं परिवार में खुशी की लहर दौड़ गयी।
बता दे कि उत्तराखण्ड के रानीखेत की तहसील के ग्राम रैली में आतंक का पर्याय बने आदमखोर तेंदुए ने रविवार को एक बुर्जुग एवं उसकी गाय को निवाला बना लिया था। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद विभाग ने तेंदुए को आदमखोर घोषित कर डीएफओ ने परमिट जारी कर नगर के मोहल्ला शेखान निवासी मरहूम नवाब आसिफ विकार के बेटे नवाब साद बिन आसिफ (सैफी) से संपर्क कर उन्हें रानीखेत बुलाकर आदमखोर तेंदुए को मार गिराने का आह्वान किया।
जिस पर नवाब सादबिन आसिफ 10 मार्च की रात 12 बजे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और उसी रात से आदमखोर तेंदुए की तलाश में जंगल में गश्त करते हुए एक मचान बनाकर बैठ गये। बृहस्पतिवार देर रात आदमखोर तेंदुए उसी जगह घूमता दिखाई देने पर नवाब सादबिन आसिफ ने अपनी बंदूक से उसे पहली गोली में ढ़ेर कर दिया।
इस बात का पता चलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। यह खबर मिलते ही ग्रामीणों में भी खुशी की लहर दौड़ गयी। वन विभाग के डीएफओ अल्मोड़ा श्री यादव ने भी साद बिन आसिफ (सैफी) का शुक्रिया अदा करते हुए सम्मानित किया। वहीं शादबिन आसिफ (सैफी) के चाचा कासिफ विकार ने शुभचिंतकों को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।

