जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी के निर्देश पर मंगलवार को एमडीए इंजीनियरों की टीम ने अब्दुल्लापुर में अवैध रूप से विकसित की गई अवैध कॉलोनी पर बुलडोजर चला दिया। यह ध्वस्तीकरण कई थानों की पुलिस मौजूदगी में किया गया, इसके बावजूद कुछ लोग विरोध करने भी पहुंच गए थे।
जिस कॉलोनी में ध्वस्तीकरण किया गया है, उस कॉलोनी का करीब 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल है।
तहसीलदार विपिन कुमार ने कई दिन पहले भावनपुर थाने से फोर्स की मांग की थी। आशंका जतायी गई थी कि इस दौरान लोग बवाल कर सकते हैं, जिसके चलते कई थानों की फोर्स मंगलवार की सुबह मांगी गई थी।
फोर्स लेकर तहसीलदार सुबह ही अब्दुल्लापुर स्थित अवैध कॉलोनी में पहुंचे तथा बुलडोजर चला दिया। यह कॉलोनी सनबीम स्कूल के पीछे काटी जा रही थी। बिल्डर मोहम्मद जुबैर इस अवैध कॉलोनी को विकसित कर रहे थे। एमडीए इंजीनियरों की टीम ने सड़क, साइट आॅफिस, भरी गई नींव व दीवारों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
यह तोड़फोड़ अभियान करीब तीन घंटे तक चला, जिसके बाद ही एमडीए की टीम लौटी। ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान जेई राकेश महलवाल, राजबल सिंह सिसौदिया, देवेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे। ध्वस्तीकरण से पहले बिल्डर को नोटिस दिया गया था, मगर इसके बाद भी बिल्डर ने कॉलोनी में निर्माण कार्य जारी रखा।
जिसके चलते फिर एमडीए ने ध्वस्तीकरण करने का नोटिस भी दिया। फिर भी बिल्डर की तरफ से एमडीए में अपना पक्ष नहीं रखा तथा नहीं तलपट मानचित्र ही दाखिल किया। इस तरह से मंगलवार को भारी फोर्स के साथ एमडीए ने ध्वस्तीकरण किया। ध्वस्तीकरण के दौरान भावनपुर, गंगानगर, इंचौली सहित अन्य कई थानों की पुलिस बल मौजूद रहा।
शोभापुर की अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
अब्दुल्लापुर में अवैध कॉलोनी पर तो अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण कर दिया, लेकिन एनएच-58 पर स्थित शोभापुर गांव से ठीक पहले विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी पर बुल्डोजर कब चलेगा? इस पर कोई कार्रवाई एमडीए ने अभी नहीं की है। हाइवे से बिल्डर ने किसान की जमीन खरीदकर रास्ता भी मुहैय्या करा दिया, लेकिन एमडीए ने इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
यह बड़ी कॉलोनी विकसित की जा रही है। इसका तलपट मानचित्र तक स्वीकृत नहीं है। फिर भी इस कॉलोनी के बिल्डर को एमडीए के इंजीनियर क्यों बढ़ावा दे रहे हैं? यह बड़ा सवाल है। जब एमडीए वीसी सख्त हैं, फिर भी कार्रवाई करने से इंजीनियर क्यों डर रहे हैं?
धड़ाधड़ मकान बन रहे हैं। यह तो हाइवे से लगी कॉलोनी की स्थिति हैं। जो गली-मोहल्लों में भी बुरा हाल है। भोला रोड पर भी कई अवैध कॉलोनी काट दी गई है। इन पर भी कोई कार्रवाई इंजीनियर नहीं कर रहे हैं। इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं?

