जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गंगानगर में अधिग्रहण की गई जमीन पर एमडीए को जैन बंधुओं से कब्जा नहीं मिल पा रहा है। लंबे समय से एमडीए कब्जा लेने के लिए परेशान हैं, लेकिन स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। प्राधिकरण की तरफ से बार-बार जैन बंधुओं को पत्र भेजकर जमीन पर कब्जा देने के लिए चेतावनी दी जा रही हैं, लेकिन फिर भी जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा है। कुछ जमीन पर तो पहले ही एमडीए कब्जा ले चुका हैं, लेकिन करीब 50 बीघा जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। यह जमीन बड़ी कीमती है। एमडीए के ले-आउट में हैं, लेकिन विकास अधूरा है।
गंगानगर नाले पर एमडीए ने डिवाइडर के साथ सड़क का निर्माण भी कर दिया है। मवाना रोड से परीक्षितगढ़ मार्ग को आपस में जोड़ा हैं। यह शहर के लिए महत्वपूर्ण हैं, मगर इसी रोड से सटकर करीब 50 बीघा जमीन जैन बंधुओं की हैं, जिस पर एमडीए को कब्जा नहीं मिल रहा है। लंबे समय से इस जमीन पर कब्जा लेने के लिए एमडीए प्रयास कर रहा है। बार-बार पत्र व्यवहार भी किया जा रहा हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला।
यह मामला कमिश्नर की अदालत में भी चल चुका हैं। अब फिर से जमीन पर कब्जे का मामला गरम हो गया हैं। जमीन पर कब्जा लेने के लिए एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने विभागीय अधिकारियों की मीटिंग भी ली, लेकिन इसको लेकर एमडीए सटीक प्लानिंग तैयार नहीं कर पा रहा है।
इसी तरह से शताब्दीनगर में भी हैं, जहां पर 200 बीघा जमीन पर एमडीए को कब्जा नहीं मिला। एमडीए दो बार इसका मुआवजा भी दे चुके हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा किसान नहीं दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि नई जमीन अधिग्रहण नीति के तहत उन्हें मुआवजा दिया जाए, जिसके बाद ही किसान जमीन पर कब्जा देंगे। नई नीति के अनुसार एमडीए मुआवजा देने को तैयार नहीं हैं, जिसके चलते यह विवाद चला आ रहा है। एमडीए की तीनों योजनाओं में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।
एमडीए: सील लगाने से पहले निर्माण किये जाएंगे ध्वस्त
एमडीए अब सील से पहले ही अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलायेगा। इसके निर्देश प्राधिकरण उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने इंजीनियरों को दिये हैं। कहा है कि सील लगाने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया जाता है। अब सील से पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।
यही नहीं, एक वर्ष पहले जिनके ध्वस्तीकरण के आदेश हुए थे,उन आदेशों पर भी अमल किया जा रहा है। इसमें कार्रवाई करने के लिए फाइलों को खंगाला जा रहा है। इंजीनियर फाइलों को देखकर आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। पुलिस को भी लिखा जा रहा है।
दरअसल, पहले यह होता था कि एमडीए पहले नोटिस भेजता था तथा फिर थाने को पत्र लिखकर निर्माण को रुकवाया जाता था, लेकिन इसके बाद ही सील की कार्रवाई की जाती थी। अब सील की कार्रवाई से पहले ही ध्वस्तीकरण एमडीए कर सकता है। ऐसे निर्देष वीसी ने दिये हैं। उनके इन निर्देशों के बाद हड़कंप मच गया है।
कहा जा रहा है कि जोनल अधिकारी अब अपने-अपने जोन की उन फाइलों को खंगाल रहे हैं, जिनमें एक वर्ष पहले ध्वस्तीकरण के आदेश हुए थे तथा फाइलों को दबा दिया गया था। वेदव्यासपुरी में जिन चार दुकानों का ध्वस्तीकरण हुआ है तथा वहां पर जेई पर हमला किया था, इसके ध्वस्तीकरण आदेश भी एक वर्ष पहले हुए थे।
इन दुकानों का निर्माण जयपाल यादव ने कराया था तथा इन दुकानों को बेच दिया गया था। अब वहां पर व्यापारिक गतिविधियां संचालित की जा रही थी। इन दुकानों को एमडीए ने ध्वस्त कर दिया। हालांकि जो बिल्डर इन दुकानों का अवैध तरीके से निर्माण करके गया है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अब जिन लोगों ने इन दुकानों को खरीदा था, वो बिल्डर जयपाल यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कर रहे हैं, क्योंकि अवैध दुकानों को खरीदकर व्यापारियों को बिल्डर ने ठग लिया हैं। इसके लिए एमडीए में भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया है, जिसकी पुष्टि एमडीए अधिकारियों ने भी की है।
रेरा में पंजीकरण नहीं, फिर भी विकसित की जा रही कॉलोनियां
रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (रेरा) में एमडीए समेत सिर्फ 45 फर्म पंजीकृत हैं, जबकि मेरठ जनपद में कॉलोनियां 200 से अधिक विकसित की जा रहीं हैं। नियमानुसार, 500 वर्ग मीटर से अधिक या आठ फ्लैट की सभी योजनाओं का रेरा में पंजीकरण कराना आवश्यक है। इसके उलट शहर और सरधना व मवाना क्षेत्र में धड़ल्ले से प्लॉटिंग हो रही है। खेत-गड्ढे तक में कॉलोनी बसाई जा रहीं हैं।
आम आदमी प्लॉट या फ्लैट लेते वक्त ठगा न जाए और बिल्डर्स की जिम्मेदारी तय हो सके, इसी उद्देश्य से रेरा कानून लागू किया गया। जुलाई 2017 के बाद से सभी आवासीय, व्यावसायिक योजनाओं के लिए प्लाटिंग या अपार्टमेंट बनाने के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक कर दिया गया। नियम है कि 500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन या आठ फ्लैट से अधिक की कोई भी योजना संचालित करने के लिए रेरा में पंजीकरण कराना होगा, मगर, इन तीन सालों में महज 45 फर्म ने पंजीकरण कराया, जबकि दो सौ से अधिक कॉलोनियां या अपार्टमेंट बनकर तैयार हो गए।
निर्माण की प्रक्रिया तेजी से शहर में चल रही है। एनएच-58 पर शोभापुर व योगीपुरम के बीच करीब एक सौ बीघा जमीन में कॉलोनी विकसित की जा रही हैं। बड़ी तादाद में मकान भी बनते जा रहे हैं, लेकिन बिल्डर ने रेरा में पंजीकरण नहीं करा रखा है। इस तरह से सरकार को बिल्डर राजस्व का नुकसान पहुंचा रहा है। इस पर एमडीए ने अभी तक कोई कार्रवाई भी नहीं की है।
45 में से नौ पंजीकरण एमडीए के, बाकी में भी कुछ ही फर्म के ज्यादा
खुद मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) सितंबर 2020 में सर्वे कर 153 अवैध कॉलोनियां चिह्नित कर चुका है। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रेरा को पत्र भी लिखा गया है। ये तो वे कॉलोनियां हैं, जो प्राधिकरण सीमा के भीतर आती हैं। प्राधिकरण की सीमा के बाहर भी तेजी से अवैध कॉलोनियां बसाईं जा रहीं हैं। सीमा विस्तार में सरधना व मवाना को भी प्राधिकरण में शामिल किया गया है, वहां भी अवैध तरीके से कॉलोनियां कट रही है।
रुड़की रोड पर शांतिनगर स्थित कालंदी कुंज कॉलोनी का रेरा में कोई पंजीकरण नहीं हैं, फिर भी यहां पर एक सौ से ज्यादा मकानों का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस पर भी रेरा ने शिकंजा नहीं कसा है। रुड़की रोड पर कई अवैध कॉलोनियां आकार ले रही हैं, मगर कार्रवाई कुछ नहीं।
इसी तरह से सरधना रोड पर भी कई अवैध कॉलोनियां काटी जा रही है। खिर्वा रोड पर भी कई अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं, जिनका रेरा में पंजीकरण तक नहीं हैं मगर इनके खिलाफ कोई कार्रवाई रेरा ने भी नहीं की है।

