Tuesday, May 12, 2026
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होम वर्क के बगैर पहुंचे अफसर, सवालों पर झांक रहे थे बगले

  • म्यूटेशन के नाम पर निगम प्रशासन को लूट की छूट से कार्यकारिणी सदस्यों की ना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में बगैर होमवर्क के पहुंचे नगर निगम अफसर सवालों से भागते नजर आए, लेकिन कार्यकारिणी सदस्य पार्षद अफसरों का आसानी से पीछा छोड़ने के मूड में कतई नहीं थे। पार्षदों के सवालों से परेशान निगम अफसर बगले झांकने को मजबूर थे।

शनिवार को हुई कार्यकारिणी से महानगर वासियों को लिए गुड़ न्यूज संपत्तियों के मुटेशन के नाम पर निगम प्रशासन की लूट पर लगाम कस दी गयी है। इतना ही नहीं मुटेशन की फीस को वर्तमान के मुकाबले बेहद कम किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर अगले कुछ दिनों में होन जा रही बोर्ड बैठक में अंतिम मोहर भी लगा दी जाएगी।

शहर घंटाघर स्थित टाउन हाल के तिलक हाल में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता व नगरायुक्त मनीष बंसल के संचालन में हुई कार्यकारिणी की लंबी चली बैठक में तमाम पार्षद पार्टी लाइन से ऊपर उठकर आम आदमी को राहत के मुदों पर एकजुट नजर आए।

कार्यकारिणी की पिच पर पारी की शुरूआत की भाजपा के अनुज वशिष्ठ ने। उन्होंने संपत्तियों के मुटेशन के नाम पर अंधाधुध फीस वसूली को लेकर जमकर विरोध किया। इस विरोध में उन्हें भाजपा ही नहीं विपक्ष का भी साथ मिला। उनका कहना था कि फीस के नाम पर की जा रही लूट के कारण ही लोगों ने अब नगर निगम में संपत्ति के मुटेशन कराना बंद कर दिए हैं।

सदन को जानकारी दी गयी कि चालू वित्तीय वर्ष में कुल 42 हजार रजिस्ट्री करायी गयीं। इनमें से 70 रजिस्ट्री नगर निगम क्षेत्र में हुई हैं। जबकि अंधधुंध फीस के चलते केवल 16 सौ संपत्तियों के मुटेशन हुए। मुटेशन फीस पहले 500 रुपये थी। जिसको बगैर जिम्मेदाराना तरीके से बढ़ाकर अब 10 से 50 हजार तक कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण महामारी के चलते लोगों का काम धंधा खत्म हो चुका है।

आय के साधन नहीं रहे। ऐसे में मुटेशन के नाम पर निगम प्रशासन को लूट की छूट नहीं दी जा सकती। इस मुद्दे पर पूरा सदन एक साथ नजर आया। बाद में तय किया गया कि हजार रुपये या फिर अधिकत पांच हजार तक अलग-अलग स्लैब में तय किए जाएं। इस प्रस्ताव पर आगामी बोर्ड बैठक में अंतिम मुहर लग जाएगी।

होर्डिंग के सवाल बने गले की फांस

पूरे महानगर में लगवाए गए करीब पांच हजार होर्डिंग को लेकर पूछा गया सवाल नगर निगम के अफसरों के जी का जंजाल बन गया। अनुज वशिष्ठ ने होर्डिंग प्रभारी रणसिंह से जानना चाहा कि कितने होर्डिंग लगे हैं। इस पर वह काफी देर तक कुछ नहीं बोल सके, लेकिन जब मामला बढ़ने लगा तो नगरायुक्त को हस्तक्षेप करना पड़।

बाद में नगरायुक्त के निर्देश पर जब रण सिंह ने बताया कि मात्र 700 होर्डिंग ही उनके यहां रजिस्टर्ड हैं तो सभी के मुंह खुले रह गए। पूरे शहर में पांच हजार से ज्यादा होर्डिंग का अनुमान है और होर्डिग प्रभारी के पास लिखा पढ़ी में कुल संख्या 700 है।

ट्रांसफर कालोनियों के रखरखाव पर सवाल

29 जनवरी 2019 को एमडीएम ने नगर निगम को श्रद्धापुरी फेज-दो, डिफेंस एन्क्लेव, पांडव नगर, गंगानगर, सैनिक विहार, वेद व्यासपुरी, रक्षापुरम, ध्यानचंद नगर सरीखी कालोनी हैंड ओवर की थीं। इन कालोनियों के साथ नलकूप, पानी की टंकी आदि भी हैंड ओवर कर दी गयी हैं, लेकिन पानी की टंकियों के रखरखाव के नाम पर जो खर्च किया जा रहा है उसमें भी बड़ा झोल है।

ये रहे मौजूद

कार्यकारिणी की बैठक में महापौर सुनीता वर्मा, नगरायुक्त मनीष बंसल, अपर नगरायुक्त श्रद्धा शांडिल्य, उपाध्यक्ष रंजन प्रभाकर, अनुज वशिष्ठ, ललित नागदेव, सुनीता प्रजापति, अंशुल गुप्ता, अजय भारती, संदीप रेवड़ी, दीपिका गुप्ता, अब्दुल गफ्फार, कुंवर इकरामुद्दीन वालियान, नाजरीन व सितारा बेगम के अलावा निगम के सभी अनुभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

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