Sunday, March 15, 2026
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दुकान बदली, राशन को भटक रहे कार्डधारक

  • आईडी दिखाने के नाम पर किया जा रहा परेशान, दुकानदार गायब, कर्मचारी चला रहा दुकान
  • लोगों ने राशन के लिये किया हंगामा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: राशन की दुकान क्या बदली लोगों को राशन मिलना ही बंद हो गया। गेहूं और चावल के लिये लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। आईडी के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। आईडी के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। यहां तक कि दुकान पर कोविड के नियमों की भी अनदेखा की जा रही है।

बता दें कि कुछ महीने पहले अहमदनगर गली नंबर-छह में इरफान की राशन की दुकान थी जो अब मलियाना निवासी सीता गुप्ता के नाम अटेच कर दी गई है। वार्ड के बाहर के व्यक्ति को राशन की दुकान सौंप दी गई है। दुकानदार अब लोगों को राशन नहीं दे रहा है जिसके चलते उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। नई दुकान पर काम करने वाले लोग कार्ड धारकों को आईडी मांग कर उन्हें परेशान कर रहे हैं।

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आईडी लाने के बावजूद लोगों को राशन नहीं मिल रहा है। गुरुवार को इसे लेकर लोगों ने काफी देर तक हंगामा किया। लोगों का कहना है कि उन्हें दुकान बदलने के बाद से गेहूं कहीं और से मिल रहा है और चावल कहीं और से मिल रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

कार्ड धारकों का आरोप है कि दुकानदार अपनी दुकान से गायब रहता है और एक अन्य कर्मचारी जिसका नाम जतिन है वह दुकान चला रहा है। गुरुवार को जब लोगों ने दुकान पर पहुंचकर हंगामा किया तो सीता गुप्ता मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

लोगों का आरोप है कि दुकानदार ने बिना पहचान के दुकान खोल रखी है। दुकान के बाहर दुकान का कोई बोर्ड नहीं लगा है जिसके कारण लोगों को दुकान का पता नहीं चल पाता है। इस कारण वह दुकान तक नहीं पहुंच पाते। जिस बात का लाभ दुकानदार उठाता है।

कोविड के नियमों का भी नहीं हो रहा पालन

दुकान पर राशन बांटने के दौरान कोविड नियमों की भी अनदेखी की जा रही है। दुकान पर लोगों की भीड़ एकत्र है और यहां न तो लोग दो गज की दूरी के नियम का पालन कर रहे हैं और न ही मास्क पहनकर राशन लेने आ रहे हैं। दुकानदार की ओर से भी सैनिटाइजेशन व अन्य व्यवस्था नहीं की गई है। दुकान पर कार्य करने वाले लोग भी बिना मास्क के ही अपना काम कर रहे हैं। ऐसे में कोविड के नियमों का उल्लंघन खुले तोर पर किया जा रहा है। किसी को किसी की नहीं पड़ी है सब अपनी जान हथेली पर लेकर चल रहे हैं।

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