Saturday, March 21, 2026
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10 दिन में 837 संक्रमित और सेंटरों पर वैक्सीन खत्म

  • सरकारी सेंटरों पर वैक्सीनेशन को लेकर लगाए जा रहे गंभीर आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हालात बेहद नाजुक और डरावने होते जा रहे हैं। या यूं कहे कि पिछले साल से भी बुरे हालात देखने पड़ सकते हैं। 10 दिन के अंदर संक्रमण के 837 केस आए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस रफ्तार से संक्रमण बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर बेकाबू होता जा रहा कोरोना संक्रमण स्वास्थ्य विभाग व सिस्टम की निपटने की तैयारियों की पोल खोलने लगा है।

शनिवार को कई सेंटरों से वैक्सीनेशन के लिए गए लोगों को उल्टे पैर लौटा दिया गया। कुछ सेंटरों पर तो वैक्सीन बंद के नोटिस चस्पा थे। जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। वैसे-वैसे वैक्सीनेशन को लेकर दावों की भी पोल खुलने लगी है।

दरअसल, केस बढ़ने के साथ ही अब वैक्सीन की कमी होने लगी है। वैक्सीन की कमी का असर सबसे ज्यादा उन वैक्सीनेशन सेंटरों पर पड़ रहा है, जोकि दूरदराज के हैं। कुछ सेंटरों पर वैक्सीन को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही या फिर लेट लतीफी की भी शिकायतें सुनने को मिली हैं।

52 सरकारी और 40 प्राइवेट सेंटर

कोरोना संक्रमण की दूसरी वेव से पहले तथा वैक्सीन आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो वैक्सीनेशन को लेकर जो दावे किए गए थे, उन दावों की कोरोना की दूसरी वेव के आने के बाद हवा निकलती नजर आ रही है। जनवरी माह में शुरू किए वैक्सीनेशन की यदि बात की जाए तो वैक्सीनेशन के वर्गीकरण पर भी कम सवाल नहीं।

नया स्ट्रेन ज्यादा घातक

कोरोना के नए स्ट्रेन या वर्तमान स्ट्रेन की बात करें को यह पहले स्ट्रेन से बहुत ज्यादा घातक है। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेश बंसल बताते हैं कि पहले स्ट्रेन के अपेक्षा ये स्ट्रेन तेजी से लोगों को अपना निशाना बना रहा है। इसके बढ़ने की रफ्तार से खुद आईसीएमआर के वैज्ञानिक भी हैरान हैं। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले में मेरठ में ही 10 दिन के अंदर 837 केस आए हैं। यह एक बड़ी संख्या हैं।

फैसलों में देरी से हुए हालात बेकाबू

वैक्सीनेशन को लेकर क्राइटेरिया का फैसला तय करने में जो देरी सिस्टम के स्तर से हुई उसने कोरोना संक्रमण के हालातों को बेकाबू करने का काम किया है। नाम न छापे जाने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक बडे अधिकारी बताते हैं कि वैक्सीन के जिस प्रकार के कायदे कानून तय किए गए थे, उसने ही कोरोना को फैलने का मौका दिया है। अब हालात यह है कि कोरोना महामारी आउट आॅफ कंट्रोल होती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के हाथ में विकल्प बहुत कम रह गए हैं। हकीकत तो यह है कि जहां तक वैक्सीन की बात है तो इसकी राशनिंग व्यवस्था ने संक्रमण को फलने फूलने का पूरा मौका दिया।

ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का

मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि नयी व्यवस्था में मेडिकल में फ्लू ओपीडी के सामने बनाए गए वैक्सीनेशन सेंटर में व्यवस्था सुचारू चल रही है। बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। कई बार कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आॅनलाइन आवेदन नहीं किए होते ऐसे लोगों को लौटा दिया जाता है। वैक्सीन की कमी सरीखी फिलहाल कोई बात नहीं है।

ये कहना है सर्विलांस अधिकारी का

वैक्सीन की कमी को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वास्थ्य विभाग के सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान का कहना है कि जो टारगेट तय होता है, उसके पूरा होने के बाद जो लोग वैक्सीनेशन के लिए सेंटर पर पहुंचते हैं, उनको अगली बार आने को कहा जाता है। वैक्सीन की कमी किसी सेंटर पर नहीं है। जैसे डिमांड आती है, वहां वैक्सीन भेज दी जाती है। पूरा कार्य आॅनलाइन है। प्राइवेट व सरकारी कुल मिलाकर करीब 103 सेंटरों पर वैक्सीन लगायी जा रही है।

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