Friday, March 6, 2026
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शराब से मौत पर कब टूटेगी कुम्भकर्णी नींद ?, आखिर किसके दबाव में है ‘सिस्टम’ ?

  • चमरावल गांव के बाद नौरोजपुर गुर्जर में भी एक व्यक्ति की हो गई थी मौत
  • चमरालव गांव में छह लोगों की शराब पीने से हो चुकी है मौत, परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठाए सवाल

मुख्य संवाददाता |

बागपत: जहरीली शराब का कहर जनपद में जारी है। बागपत जनपद का सरकारी सिस्टम इस पर पर्दा डालने में लगा है। हालांकि दबाव डालना पुलिस को रात्रि में भारी भी पड़ गया था और जिस युवक को उठाकर पुलिस लाई थी उसे छोड़ना भी पड़ गया था। सवाल यह है कि आखिर क्यों मामले को दबाया जा रहा है?

अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए क्यों मृतकों के परिजनों पर दबाव बना रहे हैं? अब तो परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसके बाद पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई पर भी अब सवाल खड़े होंगे।

चमरावल गांव में छह लोगों की मौत हो चुकी है और नौरोजपुर गुर्जर गांव में एक व्यक्ति की मौत भी शराब से हुई है। जहरीली शराब का कहर चमरावल के बाद अब नौरोजपुर गुर्जर गांव में भी पहुंच गया है।

सात मौतों के बाद भी अधिकारी सिर्फ छोटे तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित है। बड़ा शराब माफिया अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है या फिर पुलिस का तंत्र बड़े माफियाओं को पकड़ने में फेल है।

सबसे बड़ी बात अभी तक यही सामने आ रही है कि पुलिस, प्रशासन व आबकारी विभाग शराब से मौत स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जबकि सीएम स्तर से भी शराब की घटना स्वीकार कर ली गई है, उसके बाद भी अधिकारी पर्दा डालने में लगे हुए हैं। चमरावल गांव में दो दिन में छह लोगों की मौत पर जो हाईवोल्टेज खेल हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है।

परिजन खुद इस बात को उठा रहे हैं, लेकिन अधिकारी उस आवाज को भी दबाने में लगे हुए हैं। शनिवार की रात्रि में मृतक श्यामलाल के बेटे देवेंद्र को उसके घर से पुलिस उठा लाई। जिसके बाद ग्रामीण व उसके परिजन वहां पहुंचे और हंगामा किया। हंगामे को बढ़ता देख देवेंद्र को छोड़ दिया।

मामले में सीओ ने कहा कि आगे की कार्रवाई और परेशानी पूछने के लिए बुलाया था। अब सवाल यह है कि पुलिस कब से लोगों की परेशानी पूछने लगी है? जब परिजन चिल्ला कर कह रहे हैं कि उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। सवाल यह है कि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी क्यों दबाव बना रहे हैं।

मृतकों के परिजनों के जब बयान हो चुके हैं तो उन्हें क्यों परेशान किया जा रहा है? शराब की मौत जब परिजन कह रहे हैं तो उसे बयान में क्यों दर्ज नहीं किया जा रहा है? अब तो परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक श्यामलाल के भाई मोहनलाल ने पीएम रिपोर्ट पर सवाल खडे कर दिए हैं। उनका कहना है कि उसके भाई की मौत शराब पीने से हुई है। पुलिस-प्रशासन ने हमें निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन वह नहीं हुआ। दबाव डालने के बाद ही पूरा प्रकरण हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट सही आने का आश्वासन दिया था, जोकि सही नहीं आई है। उन्हें न्याय नहीं मिला है। उन्हें न्याय मिलना चाहिए और आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।

पुलिस ने मेरे बेटे को क्यों उठाया: राजबाला

मृतक श्यामलाल की पत्नी राजबाला की आंखों से आंसुओं का सैलाब नहीं थम रहा है। सिसकती जुबां और गमजदा राजबाला सिर्फ सिस्टम से यही पूछ रही है कि उसके बेटे को क्यों उठाया गया था? जब वह बयान दे चुकी है तो उसके बेटे को पुलिस क्यों लेकर गई थी,उन पर क्यों दबाव बनाया जा रहा है? उनका कहना है कि शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए और शराब बेचने वाले पकड़े जाने चाहिए। मेरे पति के साथ जो हुआ वह किसी अन्य के साथ न हो। उसने यह भी गुहार लगाई है कि उसे आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। अब वह परिवार का कैसे गुजारा करेगी?

मेरे बेटे को नहीं मिला इलाज: ओमदत्त

मृतक मुकेश के पिता ओमदत्त ने बताया कि मुझे जानकारी दी गई थी कि मुकेश की तबियत खराब हो गई है। उसे चिकित्सक के यहां लेकर गए हैं। पिलाना अस्पताल से बागपत भेज दिया था, लेकिन बागपत कोई इलाज नहीं मिला। चिकित्सक वहां अपनी ही बात करते रहे, अगर इलाज समय पर करते तो शायद वह बच सकता था। हालांकि ओमदत्त का कहना है कि उसके बेटे ने शराब पी है या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, क्योंकि वह घर पर नहीं थे।

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