- एएमयू के प्रोफेसर मौला बख्श के इंतकाल से साहित्य को झटका
- समाजसेवी संंगठनों और यूडीओ ने पेश की खिराजे अकीदत
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: अलीगढ़ मुस्लिम विवि में प्रोफेसर सहित कई पदों पर रहे मौला बख्श के इंतकाल से उर्दू साहित्य को बड़ा झटका लगा है। उनके निधन से उर्दू के चाहने वालों को गहरा सदमा पहुंचा है जनपद के समाजसेवी और उर्दू डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन से जुडे पदाधिकारियों ने उन्हे निधन से उर्दू साहित्य को बड़ा नुकसान बताते हुए रंजोगम का इजहार किया है।
जनपद में उर्दु डेवलेपमेंट आर्गेनाइजेशन ने उनके इंतकाल पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी भरपाई नहीें की जा सकती। यूडीओं के जिलाध्यक्ष कलीम त्यागी ने बताया कि प्रोफेसर मौला बख्श बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थे और गुरूवार की सवेरे उन्होने आखिरी सांस ली।
यूडीओ की बैठक में कलीम त्यागी ने उनके जीवन पर रोशनी डालते हुए कहा कि वह एक अच्छे लेखक भी रहे हैं उन्होन अपनी मिलनसारी और प्रतिभा के बल पर कम समय में ही लोकप्रियता हासिल की और अलीगढ़ में उर्दू डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के संरक्षक के रूप में सबके सरपस्त रहे। कलीम त्यागी ने बताया कि वह पिछले एक साल से किताब लिख रहे थे, जो 2500 पृष्ठ पर आधारित थी उर्दू आलोचना पर लिखी पुस्तक जब भी प्रकाशित होगी उर्दू साहित्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
संगठन के संरक्षक डा.शमीमुल हसन, संयोजक तहसीन अली, सीनियर जर्नालिस्ट गुलफाम अहमद, उपाध्यक्ष मूसा कासमी, कोषाध्यक्ष बदर खान, सचिव शमीम कस्सार, हाजीऔसाफ अहमद, कारी सलीम मेहरबान, डा. सलीम सलमानी, उर्दू टीचर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष रईसुदÞदीन राना, जिलाध्यक्ष शराफत अली, महासचिव शहजाद अली, मास्टर शुएब अहमद सहित सेक्युलर फ्रंट की बैठक में संयोजक गौहर सिद्दीकी व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा प्रोफेसर मौला बख्श समाज के लिए आईना थे उन्होने हमेशा धर्म और जाति से ऊपर उठकर समाज को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया। उन्होने उन्हे खिराजे अकीदत पेश करते हुए कहा कि उनकी भरपाई नहीं की जा सकती अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि जो अमन मौहब्बत का चिराग प्रोफेसर ने जलाया उसे बुझने नहीं देना है।

