- दवा व्यापारियों ने कहा अस्पतालों को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हाहाकार मचा है। लोग परेशान हैं इंजेक्शन के लिये मारे मारे फिर रहे हैं, लेकिन उन्हें इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। उधर, दवा व्यापारियों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधक जान बूझकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। अस्पताल संचालकों को पहले ही बता दिया गया है कि इंजेक्शन प्रशासन की जानकारी के बाद उपलब्ध होंगे उसके बावजूद मरीजों को परेशान किया जा रहा है।
कोरोना महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन काम आ रहा है। इसका इस्तेमाल फेफड़ों के संक्रमण को दूर करने के लिये किया जा रहा है। बता दें कि कोरोना में इसका इफेक्ट आने के बाद से इन इंजेक्शन की डिमांड भी बढ़ रही है और इनकी कालाबाजारी भी हो रही है। जिसके बाद से यह इंजेक्शन आम इंसान को सीधे तोर पर नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन की अनुमति के बाद ही इंजेक्शन मिलता है।
उसके बावजूद अस्पताल संचालक लोगों को इंजेक्शन के लिये धक्के कटा रहे हैं। वह लोगों को खैरनगर समेत अन्य शहरों में भी भेज रहे हैं। जब लोगों को इंजेक्शन प्राप्त नहीं होता तो अस्पताल संचालक स्वयं इंजेक्शन का इंतजाम करने की बात कहकर मुंह मांगे रुपये ऐंठते हैं।
प्रशासन की अनुमति पर ही मिलता इंजेक्शन
मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर शहर के अस्पताल संचालक मरीजों के तीमारदारों को परेशान कर रहे हैं। सभी को पता है कि इंजेक्शन मार्केट से प्राप्त नहीं हो पायेगा। इसके लिये प्रशासन की अनुमति ली जाती है। प्रशासन सीधे अस्पताल को मरीज के लिये यह इंजेक्शन एवेलेबल करा रहा है।
किसी को भी डायरेक्ट मार्केट में यह इंजेक्शन नहीं मिलता। उसके बावजूद लोगों को परेशान किया जा रहा है उन्हें धक्के खाने के लिये मजबूर किया जा रहा है। अगर अस्पताल संचालक पहले ही मरीज को पूरी जानकारी दे दें कि इंजेक्शन को लेने के लिये क्या प्रक्रिया है तो उसे परेशान न होना पड़े, लेकिन अस्पताल संचालक इसमें भी अपना लाभ ढूंढ रहे हैं।

