Friday, March 27, 2026
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आक्सीजन तो है पर ज्यादातर प्लांट पर नहीं हैं खाली सिलेंडर

  • 15 हजार सिक्योरिटी जमा करो, 50 रुपये प्रतिदिन देना होगा किराया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में आॅक्सीजन की किल्लत काफी हद तक कम हो चुकी है। पहले लोग आॅक्सीजन के लिये मारे मारे फिर रहे थे, लेकिन अब आॅक्सीजन पूरी होने के बाद लोगों को खाली सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ लोगों ने आॅक्सीजन को स्टॉक करके रख लिया है जिस कारण खाली सिलेंडरों की किल्लत बनी हुई है।

उधर, कुछ लोग खाली सिलेंडर के नाम पर खूब कमाई कर रहे हैं। अगर आपको खाली सिलेंडर नहीं मिल रहा है तो आप आॅक्सीजन प्लांटों पर जाकर वहां से 15 हजार रुपये सिक्योरिटी जमा कर आॅक्सीजन सिलेंडर ले सकते हैं। साथ में 50 रुपये महीना किराया भी देना होगा।

बता दें कि शहर में वर्तमान में पांच आॅक्सीजन प्लांटों से आॅक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। यहां सभी प्लांटों पर इस समय शहर के अस्पतालों को आॅक्सीजन सप्लाई की जा रही है, लेकिन आम आदमी को यहां आॅक्सीजन नहीं दी जा रही है। हापुड़ रोड बिजौली में स्थित मेरठ मेडिआॅक्सी, दिल्ली रोड उद्योगपुर स्थित अग्रवाल गैस, परतापुर स्थित कंसल गैस, रिठानी रोड स्थित कृष्णा एयर प्रोडक्ट और माहेश्वरी आॅक्सीजन प्लांट पर अस्पतालों को आॅक्सीजन सप्लाई की जा रही है।

कुछ समय पहले यहां आम लोगों को भी आॅक्सीजन दी जा रही थी, जिसे लेकर खूब मारामारी थी, लेकिन बाद में यहां भीड़ अधिक होने के कारण प्रशासन ने तीन नये वितरण केन्द्र बनाये। जिससे प्लांटों से भीड़ खत्म हो गई। अब शहर में जिन लोगों को आॅक्सीजन चाहिए वह वितरण केन्द्र पर पहुंचकर आॅक्सीजन ले सकते हैं।

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आॅक्सीजन भरपूर, लेकिन खाली सिलेंडर नहीं

वर्तमान समय की बात करें तो लोग जैसे तैसे जुगाड़ करके खाली सिलेंडर का इंतजाम करने में लगे हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन तो भरपूर है, लेकिन लोगों के पास खाली सिलेंडर नहीं है जिस कारण वह आॅक्सीजन नहीं ले पा रहे हैं।

उधर, प्रशासन भी खाली सिलेंडर को लेकर हाथ खड़े कर चुका है। सांसद ने भी लोगों से खाली सिलेंडर जमा करने की अपील की थी, लेकिन लोग आॅक्सीजन को स्टॉक करके रख चुके हैं। जब सिलेंडर भरे हुए हैं तो वह कैसे जमा कराएंगे।

प्लांट पर जुगाड़ हो तो मिल सकता है खाली सिलेंडर

आजकल खाली आॅक्सीजन सिलेंडरों के लिये मारामारी है। अगर आपकी सेटिंग प्लांट वालों या वहां काम करने वालों के साथ है तो आपका खाली सिलेंडर का जुगाड़ हो सकता है। या फिर किसी वेल्डिंग वाले से आपको खाली सिलेंडर का जुगाड़ करना पड़ेगा।

अगर आॅक्सीजन प्लांट पर आपकी सेटिंग है तो आप यहां सिक्योरिटी के तौर पर 15 हजार रुपये जमा कर रोजाना 50 रुपये किराये के हिसाब से खाली सिलेंडर ले सकते हैं। अग्रवाल आॅक्सीजन प्लांट पर काम करने वाले अनुज बताते हैं उनके यहां से कई लोग पहले आॅक्सीजन सिलेंडर सिक्योरिटी जमा करके लेकर गये हैं। जिन प्लांटों पर खाली सिलेंडर मौजूद हैं वह सिक्योरिटी जमा कराके आपको खाली सिलेंडर दे देंगे।

खाली सिलेंडर की कमी, सूरजपुर कहां से जा रहे 800 सिलेंडर

शहर में लोग लगातार खाली सिलेंडरों की किल्लत से परेशान हैं। वहीं, दूसरी ओर यहां शहर से बाहर ही खाली सिलेंडर को भेजा जा रहा है। हालांकि यह आॅक्सीजन प्लांटों की ओर से भेजे जा रहे हैं या किसी ओर की इस बात की जानकारी नहीं हो पाई है, लेकिन रिठानी रोड स्थित कृष्णा एयर प्रोडक्ट प्लांट के बाहर खड़े हुए ट्रक में मंगलवार को खाली सिलेंडर लॉड किये जा रहे थे।

जब ट्रक चालक और हेल्पर से पूछा गया कि यह सिलेंडर कहां ले जा रहे हो तो उन्होंने बताया कि यह खाली सिलेंडर हैं जिन्हें यहां मेरठ से दादरी के पास सूरजपुर लेकर जाया जा रहा है। यहां से खाली सिलेंडरों को ले जाने का क्या कारण यह बताने से उसने मना कर दिया।

एक नजर हरियाणा की पिंक रोडवेज एम्बुलेंस पर भी

हरियाणा के यमुना नगर में मरीजों की मौत इलाज की कमी और बेड की कमी के कारण न हो इसके लिये यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से हरियाना रोडवेज की पिंक बसों को एम्बुलेंस में तब्दील किया गया है। इसमें एक ही बस में चार बेड लगाये गये हैं।

आसानी से चार मरीज एक साथ जा सकते हैं और उनके तीमारदारों के बैठने के लिये भी जगह बनाई गई है। इसके अलावा बस में आॅक्सीजन सिलेंडर व चिकित्सक की भी व्यवस्था की गई है। अन्य आपातकालीन सुविधायें भी इस बस में दी गई हैं। कोरोना काल में अगर ऐसे इस्तेमाल यूपी सरकार भी करे तो मरीज की जान इलाज की कमी और एम्बुलेंस आदि की कमी के चलते न जाये।

आॅक्सीजन सप्लाई को लेकर बनाई जाये योजना

सभी शहरों में कोरोना का प्रभाव तेजी के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में कई शहर इसके प्रकोप को रोकने में कामियाब हुए हैं तो कई शहर पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं। जहां कुछ शहरों की कोरोना को रोकने में नाकामी पर बुराई की जा रही हैं तो वहीं मुंबई शहर की आॅक्सीजन प्रबंधन व अन्य प्रबंधनों को लेकर तारीफ भी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट तक ने मुंबई के आॅक्सीजन व बेड प्रबंधनों को लेकर तारीफ की है। अगर यही प्रयास मेरठ शहर व अन्य शहरों की ओर से भी किये जायें तो हम काफी हद तक इस पर काबू पाने में सफल हो सकते हैं।

बता दें कि कोरोना संकट के बीच आॅक्सीजन प्रबंधन को लेकर महाराष्ट्र राज्य के मुंबई महानगर पालिका के मुंबई मॉडल की खूब तारीफ हो रही है। इसकी तारीफ सुप्रीम कोर्ट ने भी की है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यहां आॅक्सीजन प्रबंधन व बेड को लेकर मुंबई महानगर पालिका ने अच्छा कार्य किया है। यहां केसों की संख्या का अनुमान उन्हें पहले से ही था जिसको लेकर उन्होंने पहले से ही काफी अच्छे इंतजाम किये थे। जो कि वर्तमान स्थिति में काफी फायदेमंद साबित हुए हैं।

क्या है मुंबई मॉडल?

मुंबई मॉडल को समझने के लिये पिछले साल कोरोना काल की बात करनी होगी। पिछले साल वर्ष 2020 में मई जून के महीने में कोरोना महामारी व्यापक रूप से फैली थी। उस वक्त भी अस्पतालों में आॅक्सीजन की मांग अचानक बढ़ गई थी। बता दें अस्पतालों में आॅक्सीजन की जो व्यवस्था होती है वह आईसीयू के लिये होती है, लेकिन कोविड की वजह से आॅक्सीजन की मांग दोगुनी हो गई।

मांग को देखते हुए मुंबई महानगर पालिका ने आॅक्सीजन प्लांट लगाये और मांग को देखते हुए शहर में बड़े फील्ड हॉस्पिटल बनाये जिन्हे जम्बो कोविड सेंटर्स कहा गया। वहां मुंबई महानगर पालिका की ओर से 21 आॅक्सीजन प्लांट लगाये गये। इससे शहर में आॅक्सीजन की आपूर्ति बाधित नहीं हुई। अगर आॅक्सीजन टैंकर्स के पहुंचने में देरी हुई तो अस्पतालों में फिर भी आॅक्सीजन की आपूर्ति जारी रही।

वर्ष 2021 में जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ी आॅक्सीजन की मांग भी बढ़ने लगी। इन आॅक्सीजन के प्लांट से मुंबई को काफी हद तक सहारा मिला। इन कार्यों को करने के लिये वहां पर एक टीम बनाई गई जिसने आॅक्सीजन की मांग, जरूरत, ट्रांसपोर्ट और समय पर डिलीवरी करने के कार्य पर नजर रखी। इसमें कई विभाग के अधिकारियों को लगाया गया।

जिनका काम वार्ड अधिकारियों और आॅक्सीजन उत्पादकों के बीच समन्वय स्थापित करना था। अस्पतालों में आॅक्सीजन की उपलब्धता पर नजर रखने के लिये एक व्यक्ति को अलग से लगाया गया। वार्ड में आॅक्सीजन के प्रबंधन के लिये दो अधिकारियों का नियुक्त किया गया। ये टीम राज्य के बाहर से आने वाले आॅक्सीजन टैंकरों पर लगातार नजर बनाये हुए थी।

शहर में भी हो कुछ ऐसी ही व्यवस्था

जिस तरह से आॅक्सीजन प्रबंधन मुंबई महानगर पालिका की ओर से किया गया इसी प्रकार यहां मेरठ में भी ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। यहां भी प्लांटों की संख्या बढ़नी चाहिए। जिस तरह से मुंबई में छह अलग-अलग जगहों पर 200 की संख्या में सिलेंडर आॅक्सीजन के रखे गये उसी प्रकार मेरठ में भी व्यवस्था होनी चाहिए।

जिससे जब भी आॅक्सीजन की डिमांड आये तो तुरंत यहां से आॅक्सीजन की सप्लाई की जाये। मेरठ में तीन आॅक्सीजन वितरण केन्द्र तो खोले गये हैं लेकिन इनकी संख्या को बढ़ाया जाना भी आवश्यक है।

तीसरी लहर को लेकर पहले से रहें तैयार

मुंबई में पहले आॅक्सीजन प्लांट नहीं थे वहां इस समय 21 आॅक्सीजन प्लांट हैं। अस्पतालों में भी प्लांट लगाये जा रहे हैं। यहां मेरठ में भी पांच आॅक्सीजन प्लांट हैं। इनकी संख्या को भी यहां बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा यहां अस्पतलों में भी कोविड मरीज के लिये बेड की संख्या बढ़नी चाहिए जिससे मरीजों को जल्द से जल्द भर्ती कराया जा सके।

जिस प्रकार मुंबई में जम्बो अस्पताल यानि फील्ड अस्पताल कोविड सेंटर बनाये गये यहां मेरठ में भी कोविड अस्पताल बनाये जाने चाहिए। बता दें कि यहां बेड की संख्या भी बढ़नी चाहिए। शहर के कुछ विधायक भी अपनी जगह और बेड देने को तैयार हैं प्रशासन को चाहिए कि यहां कोविड सेंटरों की संख्या को बढ़ाये और इंतजाम कराये जिससे आने वाले दिनों के लिये पहले से पहले तैयार रहा जा सके।

बढ़ाई जाये कंट्रोल रूम की संख्या

मेरठ में कलक्ट्रेट में एक कंट्रोल रूम बनाया गया हैं जहां कोविड संबंधी जानकारियां मांगी जाती हैं, यहां लोगों को एडमिट कराये जाने के बारे में पूछा जाता है, लेकिन यहां एक स्थान होने के कारण कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। प्रशासन को चाहिए कि यहां विधानसभा वार कंट्रोल रूम स्थापित करे या कंट्रोल रूम की संख्या बढ़ाये जिससे लोगों की समस्या का समाधान हो सके। कंट्रोल रूम की संख्या भी बढ़नी चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोगों को संबंधित जानकारी प्राप्त हो सके। मुंबई मॉडल के तहर प्रत्येक वार्ड में कंट्रोल रूम बनाया गया है।

दवा और इंजेक्शन की हो व्यवस्था

जिस प्रकार यहां दवाओं और इंजेक्शन को लेकर मारामारी रही है प्रशासन को इसके लिये भी पहले से तैयार होने के आवश्यकता है। प्रशासन को चाहिए कि यहां एडवांस में रेमडेसिविर इंजेक्शन और कोविड मरीज को दी जाने वाली सभी दवाएं स्टॉक में रखें। जिससे किसी को भी इस परेशानी से गुजरना न पड़े। इसके लिये प्रशासन और प्रदेश सरकार को प्रयास करने होंगे जब जाकर स्थिति काबू में हो पायेगी।

करनी होगी खाली सिलेंडर की व्यवस्था

आॅक्सीजन प्लांटों पर आॅक्सीजन वितरित करने के लिये प्रशासन को प्रयास करने होंगे। प्रशासन और सत्ताधारी सांसद और विधायकों को आगे आकर खाली सिलेंडरों की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे लोगों को आॅक्सीजन के भरे हुए सिलेंडर प्राप्त हो सके। वर्तमान में आॅक्सीजन के लिये खाली सिलेंडरों की किल्लत है। जिसके कारण सभी लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही है।

अगर प्रशासन और सत्ताधारी नेता प्रदेश सरकार से कहकर यहां खाली सिलेंडरों की व्यवस्था कराये तो काफी हद तक हालात सुधरेंगे और लोगों की जाने भी बच जाएंगी। हालांकि प्रशासन वर्तमान में आॅक्सीजन की सप्लाई करा रहा है, लेकिन वह उन लोगों को ही आॅक्सीजन दे पा रहा है जिनके पास खाली सिलेंडर मौजूद है। उधर, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि उनकी ओर से लोगों से खाली सिलेंडर जमा कराये जाने की अपील की गई है। जिनके पास खाली सिलेंडर हैं वह लोग जमा करा दें। जबकि उन्हें प्रदेश सरकार के साथ मिलकर खाली सिलेंडरों की पूर्ति करानी चाहिए।


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