- अस्पतालों पर नजर रखने को बनाये नोडल अधिकारियों का कुछ पता नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के निजी अस्पतालों का मरीजों के परिजनों के प्रति बर्ताव किसी से छिपा नहीं है। इलाज के नाम पर अस्पताल संचालकों ने लूट मचा रखी है। भाजपाई खुद इसकी शिकायत प्रदेश मुख्यालय तक कर चुके हैं, लेकिन उनकी मनमानी के आगे किसी का जोर नहीं चल पा रहा है।
उधर, प्रशासन की ओर से अस्पतालों पर नजर रखने के लिये बनाये गये नोडल अधिकारियों का ही कुछ पता नहीं है। वह जनता की बात सुने कैसे उनका फोन ही नहीं मिलता जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ता है।
शहर में सैकड़ों की संख्या में निजी अस्पताल हैं। इनमें से 26 अस्पतालों को कोविड सेंटर बनाया गया है। कुछ अस्पतालों को उनकी मनमानी के चलते कोविड सेंटरों की लिस्ट से हटा भी दिया गया था, लेकिन अब प्रशासन इन अस्पतालों की ओर से बिल्कुल ही आंखें बंद किये हुए है।
प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जो अधिकारी प्रशासन ने यहां देखरेख के लिये तैनात किये थे उनके नंबर अभी तक रेंज में नहीं आ पाये हैं। कहने का मतलब यह है कि पहले उनके नंबर मिलते नहीं थे और अब भी वही हालात हैं उनके नंबर मिल ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों में खुली लूट चल रही है। उनकी मनमानी को कोई रोकने वाला नहीं है। अस्पताल संचालक मनमाना बिल बनाकर मरीजों के परिजनों को थमा देते हैं जिसे लेकर आये दिन हंगामा हो रहा है।
नोडल अधिकारी जो अस्पतालों के लिये बनाये थे
शहर के सभी कोविड सेंटरों पर नजर रखने के लिये प्रशासन की ओर से नोडल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये थे। अब डेढ़ माह से अधिक होने को हैं, लेकिन उन नोडल अधिकारियों व अन्य स्टाफ का अभी तक पता नहीं है।
अभी तक एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है जिन्हें नोडल अधिकारियों की ओर से अस्पताल में भर्ती कराया गया हो। पिछले एक माह में एक भी बार अधिकारियों का फोन नंबर ही नहीं मिल पाया है। जनवाणी संवाददाता की ओर से कई बार उनके नंबरों पर कॉल करने का प्रयास किया गया, लेकिन नंबर आउट आॅफ रेंज मिला। अगर इसी प्रकार से नजर रखी जा रही है तो फिर कैसे अस्पतालों की मनमानी को रोका जा सकेगा।
भाजपाइयों ने सीएम से भी शिकायत
निजी अस्पतालों की मनमानी से हर कोई परेशान है। किसी को इलाज सही नहीं मिलता तो किसी का बिली अधिक बना दिया जाता है। इन सभी मामलों को लेकर भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा ने भी कई बार आलाधिकारियों से शिकायत की। यहां तक कि उन्होंने जनता की इस समस्या को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया। अब देखना यह है कि आखिर कब तक इन अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लग पायेगा।

