Wednesday, May 13, 2026
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प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर कब लगेगी लगाम ?

  • दवाइयां अलग से खरीदने के पश्चात भी बिल ऐड कर रहे पैसे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्राइवेट हॉस्पिटल में हर रोज कोई ना कोई ऐसी घटना देखने को मिल रही है। जिसमें इंसानियत शर्मसार हो जाए, मरीज की मौत के पश्चात अस्पताल प्रशासन मनमाने ढंग से पैसे वसूल रहा है। अगर तीमारदार पैसे उपलब्ध कराने में सक्षम ना हो तो हॉस्पिटल द्वारा शव देने से इनकार तक का दिया जाता है।

कुछ इसी तरह की वानगी शुक्रवार को भी देखने को मिली।जब गंगानगर स्थित अप्स नोवा अस्पताल गंएडमिट मरीज मंगल यादव निवासी हेड पोस्ट ऑफिस मेरठ कैंट की मृत्यु के पश्चात अस्पताल प्रशासन द्वारा 270000 से ज्यादा का बिल बना दिया गया। परिवार के सदस्यों द्वारा ₹200000 जमा भी कर दिए गए उसके पश्चात भी अस्पताल स्टाफ द्वारा मरीज की डेड बॉडी नहीं दी गई।

पीके यादव ने बताया कि पांच दिन से मरीज भर्ती था। बिल लगभग ₹270000 बना दिया है। जबकि दवाइयां अलग से खरीदी है। उन्होंने लगभग ₹200000 दे भी दिए हैं लेकिन कह रहे हैं कि नहीं पूरा पैसा जमा कराओ नहीं तो शव यहीं पर छोड़ दो। अस्पताल की मनमानी को देखते हुए तीमारदार ने मेरठ कोविड सहायता हेल्प ग्रुप के सदस्य एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी उत्तम सैनी से फोन कर मदद मांगी।

जिसके पश्चात उत्तम सैनिक अपनी टीम के सदस्य अभिषेक मौर्या, अनुज कुमार, सनी मोदी,शुभम पटेल, शिवम सैनी,अभिषेक त्यागी, सचिन के साथ मौके पर पहुंचे। अस्पताल स्टाफ से तीखी नोकझोंक हुई। उत्तम सैनी ने बताया कि मौके से मैनेजर फरार हो गया। लेकिन जब अस्पताल के मालिक से बात की गई। अस्पताल के मालिक द्वारा बचा हुआ बिल छोड़ दिया गया। जिसके पश्चात परिवार जन संबंधित व्यक्ति का शव लेकर अपने साथ गए। इतना ही नहीं उत्तम सैनी और उनकी टीम द्वारा संबंधित व्यक्ति के अंतिम संस्कार तक के लिए अन्य सभी प्रकार की सामग्री उपलब्ध करायी।


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