जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: दिगंबर जैन महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर एवं पंतजली योग समिति के वरिष्ठ योग प्रशिक्षक योगाचार्य ने आनलाइन योग कक्षा मे विद्यार्थियों को योगाभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि आज कोरोना वायरस का संक्रमण कमजोर इम्यूनिटी के लोगों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है।
योगाचार्य डा. मुछाल ने इम्यूनिटी एवं फेफडों को स्वस्थ रखने के लिए उदगीथ, कपाल भाति एवं अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास कराया। साथ ही इनके लाभ बताएं। फेफड़ों एवं श्वसन संस्थान संबंधी रोगोपचार में उपयोगी आसन का अभ्यास कराते हुए। मत्स्यासन के बारे में बताया।
पद्मासन में बैठकर कोहनियों के सहारे पीछे की ओर झुकते हुए। सिर को जमीन पर रखते हैं फिर दोनों हाथों से दोनों पैरों के पंजे को पकड़ लेते हैं। दोनों कोहनियां जमीन पर लगी रहती है। सिर भूमि पर स्थिर होता है। सिर की स्थिति इस प्रकार होती है कि मेरुदंड का अधिकतम विस्तार हो।
इस आसन के अभ्यास से आंतों एवं अमाशय के अंगो का विस्तार होता है। पेट से संबंधित समस्त रोगो में लाभकारी है। यह आसन थायराइड ग्रंथि को नियमित करता है एवं थाइमस ग्रंथि को उद्दीप्त कर प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करता है। इस आसन के अभ्यास से फेफड़ों का विस्तार होता है और फेफड़ों द्वारा श्वसन से संबंधित समस्त रोग दूर होते हैं, दमा हो या ब्रोंकाइटिस हो या कफ दोष हो।
जब गर्दन सूज जाती है, विशेषकर टॉन्सिलाइटिस होने पर इस अवस्था में गर्दन की मालिश करने पर सूजन समाप्त हो जाती है ।यह आसन पीठ में जमे रक्त का पुन: संचालन करता है। सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस तथा पेट के निचले मार्गमें जो तनाव उत्पन्न होता है। वह भी इसके अभ्यास से दूर हो जाता है। योग कक्षा मे स्वाति सिह, सोमिका जैन, आयुषी जैन, मेद्या, पारखी जैन, रुपक तोमर, अनुज, अंकुश आदि उपस्थित रहे।

