- कार्ड के बाद भी इलाज को भटक रहे मरीज, गरीबों के लिए फ्री इलाज की नहीं गारंटी
- निजी अस्पतालों में योजना के तहत इलाज इलाज दलालों के शिकंजे में
- सरकार पर बकाया होने की बात कहकर कई निजी अस्पताल काट रहे कन्नी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आयुष्मान कार्ड से गरीबों का इलाज मुफ्त में कराया जा सकता है। इसको लेकर सिस्टम को चलाने वाले अधिकारी भले ही कुछ भी दावा करें, लेकिन हकीकत इसके एकदम उलट है। आयुष्मान कार्ड का होना गरीबों के लिए फ्री इलाज की गारंटी कतई न मानी जाए। क्योंकि आयुष्मान कार्ड के नाम पर निजी अस्पतालों ने गरीबों के इलाज के नाम पर गेट बंद कर लिए हैं। कुछ ऐसे भी नर्सिंगहोम हैं जहां आयुष्मान कार्ड स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन वहां पूरा सिस्टम दलालों के शिकंजे में है।
यूं कहने को आयुष्मान कार्ड कार्ड से इलाज के लिए जनपद के चालिस निजी अस्पताल संबद्ध है, लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर ने गरीबों के नाम पर बनायी गयी इस योजना से हाथ जोड़ लिए हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर शहर के एक बडेÞ अस्पताल संचालक ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत किए जाने वाले इलाज के भुगतान के लिए तमाम मुसीबतें उठानी पडेÞती हैं।
इस योजन के तहत जिन अस्पतालों ने इलाज किया है, उनका भारी भरकम भुगतान बकाया है। ऐसा ही एक मामला पूर्वा फैय्याज अली निवासी महिला का सामने आया है। अक्को पत्नी सलीम निवासी पूर्वा फैय्याज अली चार दिन पहले घर में काम काज के दौरान अचानक फिसल कर गिर गयी थीं। उनकी कमर की हड्डी में गहरी चोट आयी थी। उनका आयुष्मान कार्ड भी बना हुआ है।
कार्ड होने के चलते परिजन इलाज के लिए उन्हें बेगमपुल कचहरी मार्ग स्थित एक बडेÞ हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर गए, लेकिन जब पता चला कि मरीज का इलाज वे इलाज का पेमेंट नकद न होकर आयुष्मान कार्ड से इलाज करना है तो हाथ खडेÞ कर दिए। मरीज को लौटा दिया। इसके बाद परिजन मरीज को लेकर गढ़ रोड स्थित एक अन्य हॉस्पिटल में लेकर गए। वहां से भी खाली हाथ लौटना पड़ा।
बाद में गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय हॉस्पिटल में महिला मरीज को भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज हो सका। परिजनों ने बताया कि इस दौरान कई अन्य अस्पतालों में भी गए, जिससे पता चला कि आयुष्मान योजना के तहत जो अस्पताल इलाज कर भी रहे हैं, वहां योजना पर दलालों ने कब्जा कर लिया है। योजना के तहत इलाज कराने के नाम पर सक्रिय दलाल तीमारदारों से पांच से 10 हजार तक की मांग करते हैं। जब यह रकम उनके हाथ में रख दी जाती है, उसके बाद ही अस्पताल इलाज शुरू करता है।
ये कहना है आईएमए का
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेश बंसल ने बताया कि भुगतान में शासन स्तर से देरी के कारण प्राइवेट अस्पताल अब कन्नी काटने लगे हैं। जहां तक सीएमओ कार्यालय सवाल है तो जैसे बजट रिलीज होता है, उसके अनुसार ही भुगतान कर दिया जाता है।
ये कहना है सीएमओ का
आयुष्मान योजना के पात्र किसी मरीज को यदि कोई असुविधा है तो वह कार्य दिवस में आकर संपर्क कर सकता है। आयुष्मान योजना से जुडेÞ अस्पताल से जो समस्या होगी उसका समाधान कराया जाएगा।

