- जाफरवाला बाग में रहने वालों से की पूछताछ, कहा हर हाल में करनी होगी जगह खाली
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जाफरवाला बाग बंगला नंबर-68, 69 में हुए कब्जे के मामले में गुरुवार को मेरठ कालेज की ओर से टीम यहां पहुंची और यहां सर्वे कर लोगों से पूछताछ की और उन्हें जल्द से जल्द जमीन खाली करने के लिये कहा। उधर, यहां पिछले सत्तर सालों से रहने वाले लोगों का कहना है कि आज उनसे यह जमीन खाली कराई जा रही है, लेकिन खुद मेरठ कालेज ने उन्हें यहां रहने के लिये कहा था।
उनका इसमें क्या कसूर है। यहां के बाशिंदों के पास आधार कार्ड, पेन कार्ड आदि कागजात तक इसी पते पर बने तो फिर अवैध कैसे हुआ।
बता दें कि बंगला नंबर-68, 69 जाफरवाला बाग प्रकरण सभी के लिये सरदर्द बनता जा रहा है। रक्षा संपदा अधिकारी हरेन्द्र चौधरी ने मेरठ में पदभार संभालते ही यहां मेरठ कालेज प्रबंधन से वार्ता कर उन्हें जमीन खाली कराने को कहा। जिसके बाद मेरठ कालेज की ओर से यहां बाउंड्री वॉल और प्ले ग्राउंड बनाये जाने की मांग रखी गई। यह जमीन मेरठ कालेज के पास ही लीज पर है।
इसमें मेरठ कालेज प्रबंधन की लापरवाही के चलते ही कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था, लेकिन यहां कुछ लोग वह भी हैं। जिन्हें खुद मेरठ कालेज प्रबंधन ने रहने के लिये कहा। मेरठ कालेज में बरसों कार्य करने के बाद चतुर्थ श्रेणी पद से रिटायर्ड हुए लोगों का परिवार यहीं रहता है।
उनके लिये यहां बड़ी समस्या खड़ी हा गई है। डीईओ से वार्ता के बाद मेरठ कालेज प्रबंधन की ओर से यहां रहने वालों को नोटिस जारी किये गये और 15 दिन में जमीन खाली करने को कहा गया, लेकिन उसके बाद कालेज प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके लेकर जनवाणी ने गुरुवार के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की, जिसके बाद गुरुवार को ही टीम वहां पहुंची और सर्वे कर लोगों से पूछताछ की। टीम के सदस्यों ने लोगों को जल्द से जल्द कहीं ओर इंतजाम करने को कहा।
उधर, मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज का कहना है किमेरठ कालेज प्रबंधन की ओर ये जाफरवाला बाग में रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर दिये गये हैं। उन लोगों को यहां से हटना होगा। यह जमीन सेना की है, मेरठ कालेज का कोई अधिकार नहीं है कि वह यहां किसी को रहने के लिये जगह दे। हालांकि जो लोग मेरठ कालेज में काम कर चुके लोगों के परिजन है तो इस विषय में भी विचार किया जायेगा, लेकिन जमीन सभी को खाली करनी होगी। कालेज के पास सेना की यह जमीन लीज पर थी सेना की मर्जी से ही यहां पर कोई कार्य होगा।

आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तक बने बंगले के पते पर
मेरठ कालेज में कई साल पहले चतुर्थ श्रेणी में कार्य करने वाले लोगों का परिवार आज कालेज प्रबंधन की गलती की वजह से बीच मझधार में है। मेरठ कालेज प्रबंधन ने ही उन्हें वहां रहने को कहा और आज कालेज प्रबंधन ही उन्हें वहां से बाहर करना चाहता है। कालेज की गलती से आज कई परिवार सड़क पर आने को मजबूर हैं।
मोहम्मद अनीस ने बताया कि उनके पिता मोहम्तद सद्दीक मेरठ कालेज में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे।
रिटायर्ड होने के बाद उन्हें कालेज प्रबंधन की ओर से यहां रहने के लिये कहा गया। आज के समय में सभी के पास यहीं के आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंक पासबुक, बिजली का बिल और ड्राइविंग लाइसेंस सभी कागजात यहीं बंगले के पते के हैं। कालेज प्रबंधन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण हमें भी यहां से हटा रहा है। ऐसे में हम अपने परिवार को लेकर कहां जायें।
उन्होंने कहा कि वह यहां पिछले 50 सालों से भी अधिक समय से रह रहे हैं। अब से पहले उनसे कुछ नहीं पूछा गया जबकि यह सब मेरठ कालेज प्रबंधन की जानकारी में था। इसके अलाव तीन चार परिवार और भी हैं जो यहां इसी प्रकार मेरठ कालेज का कर्मचारी होने के नाते यहां रह रहे हैं। उधर, कालेज प्रबंधन अब उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अगर वह इन्हें यहां से हटाना चाहते हैं तो उनके लिये कोई अन्य व्यवस्था की जाए।

