जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पीडीपी ने आरोप लगाया है कि उनकी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को बुधवार को जम्मू से लौटने के बाद लाल चौक पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल नहीं होने दिया गया।
हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए अल्ताफ व मुदासिर के परिजनों ने लाल चौक पर कैंडल मार्च का आयोजन किया था। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया है। बाद में पुलिस के एक वरिष्ट अधिकारी ने साफ किया कि महबूबा को घर में नजरबंद नहीं किया गया।
वहीं दूसरी खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के भाई मुफ्ती तसद्दुक सईद को समन जारी कर वीरवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा है। तसद्दुक सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके हैं।
इससे पहले ईडी ने महबूबा मुफ्ती की मां को इसी मामले में समन भेजा था। पार्टी ने आरोप है कि उनका दल केंद्र सरकार के खिलाफ कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम करता है तो पार्टी के किसी न किसी वरिष्ठ सदस्य को सम्मन भेज दिया जाता है।
रोष रैली निकाल महबूबा ने लगाए केंद्र के खिलाफ नारे
जम्मू में गांधीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय से महबूबा ने अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बुधवार को रोष रैली निकाली। रैली में नरेंद्र मोदी होश में आओ, अमित शाह होश में आओ के नारे लगाते हुए महबूबा मुफ्ती ने नेताओं सहित जम्मू पठानकोट नेशनल हाइवे की तरफ जाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने कंटीले तार लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हैदरपोरा मुठभेड़ को बेवजह से आतंकी मुठभेड़ का नाम दिया जा रहा है। निर्दोष कश्मीरियों का कत्ल किया गया है।
शोक संतप्त परिजनों को जल्द शव सौंपे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ताकत के बल पर कश्मीरियों को सरेंडर करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति कभी कामयाब नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है और वह जानबूझकर कश्मीरियों का कत्लेआम कर देश के दूसरे हिस्सों में वोट हासिल करना चाहती है।
भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी पर पूछे गए सवाल पर महबूबा ने कहा कि जो पाटी नाथू राम गोडसे को पूजती है उसकी कार्यशैली से संबंधित सवाल पर वह जवाब ही नहीं देना चाहती।
इस अवसर पर महासचिव अमरीक सिंह रीन, सुखविंद्र सिंह, विरेंद्र सिंह सोनू, परवेज मलिक, फिरदोस टाक आदि नेता भी मौजूद रहे।

