Thursday, April 2, 2026
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मेरठ: सद्दीक नगर में नाले पर बना दीं दुकानें

  • खुलेआम कर रखा नाले के ऊपर अवैध कब्जा
  • अधिकारियों के साथ कई बार हो चुकी है तीखी नोकझोंक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करना काफी आसान हो गया है। शहर के हालातों को देखकर कुछ ऐसा ही लगता है। कहीं नाले को पाटकर कब्जा किया जाता है तो कहीं पर नाले के ऊपर चैनर डालकर वहां दुकानें सजा ली जाती हैं। भूमिया के पुल के पास सद्दीक नगर में कुछ ऐसा ही हाल है। यहां दुकानदारों ने नाले के ऊपर ही कब्जा कर लिया है और इससे शर्मनाक क्या हो सकता है कि नगर निगम के अधिकारी यहां कब्जा हटाने भी पहुंचते हैं और बिना कार्रवाई के लौट आते हैं।

शहर में सरकारी भूमि पर धड़ल्ले से कब्जा किया जा रहा है। कहीं पर भूमाफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं तो कहीं पर अवैध रूप से दुकानों को बनाकर व्यापार चलाया जा रहा है। यहां बुढ़ाना गेट स्थित जिमखाना मैदान की बात करें तो यहां मैदान के किनारे नाले की जमीन के ऊपर ही अवैध दुकानें चल रही हैं, लेकिन इससे बड़ी लापरवाही यहां देखने को मिलती है कि भूमिया के पुल के पास सद्दीक नगर नाले के किनारे लोगों ने यहां लोहे के जाल डालकर दुकानें सजा रखी हैं। रात में मानों यहां मेला लगा रहता है। यहां अवैध रूप से दुकानें बना ली गई हैं, लेकिन कोई इन्हें रोकने वाला नहीं हैं।

एक या दो नहीं दर्जन भर से अधिक हैं दुकानें

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यहां नाले के ऊपर एक या दो नहीं बल्कि 10 से 12 दुकानदार हैं। जिन्होंने नाले के ऊपर लोहे का जाल डालकर दुकान कर रखी है। यहां लोग नाले के ऊपर ही कुर्सियां डालकर बैठे रहते हैं और कपड़े की दुकानें तक सजा रखीं हैं। दिनभर यहां लोगों की काफी भीड़ रहती है। उसके बावजूद अभी तक यहां कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बता दें कि एक दो बार नगर निगम की टीम यहां पहुंची भी, लेकिन टीम की ओर से कोई खास कार्रवाई नहीं की गई छुटपुट विरोध होते ही टीम यहां से वापस लौट जाती है। जिसके चलते यहां लोगों का कब्जा बरकरार है।

दुकानोें के कारण नहीं होती नाले की सफाई

यहां दुकानों के सामने अवैध कब्जा कोई नई बात नहीं है। नाले के ऊपर लोहे का जाल लगाये जाने के कारण यहां नगर निगम नालों की सफाई नहीं कर पाता जिसके कारण पीछे ओडियन सिनेमा के सामने नाले तक सफाई नहीं हो पाती जिस कारण यहां हमेशा समस्या बनी रहती है। यहां कई बार सफाई के लिये टीम पहुंचती है, लेकिन व्यापारियों की नाराजगी के चलते टीम को यहां से वापस लौटना पड़ता है। कई बार इसे लेकर अधिकारियों तक शिकायत पहुंची, लेकिन अभी तक यहां कोई खास कार्रवाई होती नजर नहीं आई है।

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