- अबूझ मुहूर्त के चलते शहर भर में होंगे विवाह कार्यक्रम एवं मांगलिक कार्य
- मां सरस्वती के प्रकटोत्सव की है पौराणिक कथा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पौराणिक कथाओं के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही बुद्धि, ज्ञान और विवेक की जननी माता सरस्वती प्रकट हुई थी और इस दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था । माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
इस तिथि पर ज्ञान के देवी मां सरस्वती देवी की पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ की जाती है। मान्यता के अनुसार बंसत पंचमी तिथि पर मां सरस्वती की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होती है। सरस्वती पूजा के दिन यानी माघ शुक्ल पंचमी के दिन सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षक एवं छात्रगण सरस्वती माता की पूजा-अर्चना करते हैं। सरस्वती माता कला की भी देवी मानी जाती हैं अतरू कला क्षेत्र से जुड़े लोग भी माता सरस्वती की विधिवत पूजा करते हैं। छात्रगण सरस्वती माता के साथ-साथ पुस्तक, कॉपी एवं कलम की पूजा करते हैं। संगीतकार वाद्ययंत्रों कीए चित्रकार अपनी तूलिका का पूजन करते हैं।
वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
ग्रंथों के अनुसार वसंत पंचमी पर पीला रंग के उपयोग का महत्व है। क्योंकि इस पर्व के बाद शुरू होने वाली वसंत ऋतु में फसलें पकने लगती हैं और पीले फूल भी खिलने लगते हैं। इसलिए वसंत पंचमी पर्व पर पीले रंग के कपड़े और पीला भोजन करने का बहुत ही महत्व है। इस त्योहार पर पीले रंग का महत्व इसलिए बताया गया है क्योंकि वसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊ र्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है। इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और व्यंजन बनाते हैं।
वसंत पंचमी पर पूजन विधि
इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को पीले-मीठे चावलों का भोजन कराया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है। मां शारदा और कन्याओं का पूजन करने के बाद पीले रंग के वस्त्र और आभूषण कुमारी कन्याओं, निर्धनों व विप्रों को देने से परिवार में ज्ञान, कला व सुख-शान्ति की वृद्धि होती है।
मांगलिक कार्य एवं विवाह मुहूर्त शुभ माना जाता है
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि वसंत पंचमी तिथि को विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इसी वजह से इस दिन बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। विवाह के अलावा मुंडन समारोह,यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।
वसंत पंचमी के दिन मांगलिक कार्य या कोई नया काम भी शुरू करना शुभ माना जाता है। यहां तक कि विवाह के लिए भी इस दिन बेहद उत्तम योग का निर्माण होता है। वसंत पंचमी के दिन विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ संयोग और अबूझ मुहूर्त होता है। अबूझ विवाह मुहूर्त से यहां अभिप्राय उन जोड़ों से हैं जिनके विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकल पाता है वो बेझिझक वसंत पंचमी के दिन विवाह कर सकते हैं।
वसंत पंचमी तिथि और मुहूर्त
- पंचमी तिथि आरंभ 5 फरवरी शनिवार सुबह 6 बजकर 41 मिनट से
- पंचमी तिथि समाप्त 6 फरवरी रविवार सुबह 6 बजकर 42 मिनट पर
- सिद्ध योग 5 फरवरी शनिवार को सुबह 7 बजकर 11 मिनट से शाम 7 बजकर 41 मिनट तक
- साध्य योग 6 फरवरी शाम 7 बजकर 33 मिनट तक
- इन योगों के साथ रवि योग का भी निर्माण हो रहा है।

