- सपा प्रत्याशी के बयान को प्रचार में हथियार बना रही भाजपा
- सोशल मीडिया पर खूब वायरल कराया जा रहा विवादित बयान का वीडियो
- शहर से देहात तक भाजपा के प्रत्याशी और नेता अपने सभा में छेड़ रहे जिक्र
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में शहर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी रफीक अंसारी ने बैठे बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। राजनैतिक गलियारों और सियासी चौपालों पर उनके द्वारा दिए गए बयान की बीजेपी खूब चर्चा करा रही है। अंसारी ने अपनी एक चुनावी सभा में भाजपा पर वार करते हुए सरकार में हिंदुगर्दी फैलाने का आरोप लगाया था। हालांकि निर्वाचान आयोग ने उनके इस बयान को आपत्तिजनक मानते हुए रफीक के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कराया है।

मगर, सपा प्रत्याशी की इस बयानबाजी को भाजपा के प्रत्याशी और नेताओं ने कैच कर अपने प्रचार में बड़े हथियार बना लिया है और इसका इस्तेमाल चुनावी सभाओं में जमकर किया जा रहा हैं। शहर से लेकर देहात तक की सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार अपने चुनावी भाषणों में रफीक अंसारी के बयान का जिक्र करते नहीं थक रहे हैं। भाजपा के कई उम्मीदवारों द्वारा अंसारी के विवादित बयान वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब वायरल कराया जा रहा है, ताकि इस वीडियो के सहारे वह चुनावी माहौल अपने माकूल कर सकें।
उधर, सपा प्रत्याशी रफीक के इस बयान के बाद गठबंधन के नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। जबकि भाजपा लगातार इस पर गठबंधन को घेर रही और गुंडागर्दी अभी से फैलाने का आरोप गठबंधन के नेताओं पर मंढा जा रहा है। हालांकि अंदरखाने पार्टी के नेताओं द्वारा रफीक अंसारी के इस बयान को गलत ठहराया गया है।
बता दें कि, भाजपा प्रथम चरण के मतदान से पहले खुद मुजफ्फरनगर के दंगे का जिक्र और 80-20 फीसदी के चुनाव में वोट बंटवारे की बात कर चुकी है। पार्टी के शीर्ष नेता इस बार भी चुनाव को जनहित के मुद्दों से इतर साम्प्रदायिक बनाने की कोशिश में जुटे हैं, मगर किसानों के आक्रामक होने के चलते वह अपने मंसूबों में अभी तक कामयाब होते नहीं दिख रहे थे।
रफीक अंसारी की भाजपा की पिच पर आकर बैटिंग करने के अंदाज और एक गलत बयानबाजी ने साम्प्रदायिकता के मुद्दे को फिर से हवा देने का काम कर दिया। राजनीति के जानकारों का मानना है कि पहले चरण के मतदान से पूर्व संवेदनशील चुनावी माहौल में जिस तरह उनके विवादित बयान को भाजपा भुनाने में जुट गई है, उससे पश्चिम से पूरब तक गठबंधन का गणित भी बिगड़ सकता है। हालांकि गठबंधन के मुखिया अपने चुनावी भाषणों में इससे होने वाले डैमेज को कंट्रोल करने में लगे हैं, मगर विवादित बयानबाजी का नतीजा क्या होगा? यह मतदान के बाद ही सामने आएगा।

