- होली नजदीक आते ही शराब माफिया हुए सक्रिय पुलिस प्रशासन मौन
जनवाणी संवाददाता |
मवाना: होली का पर्व नजदीक आते ही हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में शराब तस्करो की कमाई के लिए बना अवैध कच्ची शराब का गोरखधंधा एक बार फिर से शुरू हो गया है। खादर क्षेत्र में मौत के सौदागर एक बार फिर से शुरू होने से शराब माफियाओ की टोली दिन-रात भट्ठियां सुलगाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में जुट गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि गंगा की तलहटी एवं खेतों के झुंड किनारे कच्ची शराब का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासनिक अधिकारी अवैध शराब का कारोबार करने वालों नकेल कसते नजर नही आ रहे हैं।
पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी बैकफुट पर
हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले थाना हस्तिनापुर, मवाना, परीक्षितगढ़ से जुड़े खादर क्षेत्र के गांवों में शराब तस्कर भले ही अवैध शराब का धंधा धड़ल्ले से चल रहा हो, लेकिन होली का पर्व नजदीक आते ही अवैध शराब बनाने का कार्य जोरो पर शुरू हो गया है।
मौत के सौदागर अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने का धंधा चोरी-छिपे जंगलों में भट्ठी सुलगा कर दिन-रात जुटे हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। पुलिस प्रशासन की चुप्पी के चलते शराब तस्करों के हौसले बुलंदी पर नजर आ रहे हैं। हस्तिनापुर की महाभारत कालीन धरती पर काफी समय से चल रहा अवैध कच्ची शराब का गोरखधंधा पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी नकेल नहीं कस पाया है। हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में सुलगने वाली अवैध शराब का धंधा करने वालो पर चाबुक नहीं चल सका है।
स्थानीय पुलिस पर सांठगांठ का आरोप
हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में सुलगने वाली अवैध शराब की भट्ठी में स्थानीय पुलिस का तड़का लगा हुआ है। लोगों ने कहा कि बिना स्थानीय पुलिस की सेटिंग-गेटिंग से किसी भी प्रकार का अवैध शराब का धंधा नहीं किया जा सकता है। पुलिस की सांठगांठ के चलते शराब तस्कर चोरी छिपे जंगलों में भट्ठी सुलगाकर लोगों की जिदंगी से खिलवाड़ कर उनके भविष्य को चौपट कर दिया है।
अवैध शराब के गोरखधंधे पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस प्रशासनिक एवं आबकारी की टीम भले ही शराब अभियान की शुरुआत करती हो, लेकिन आजतक के अभियान में शराब माफिया पर कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है और न ही मौके पर शराब बनाने वाले तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं।
वजह यह है कि पुलिस की छापेमारी से पहले विभागीय विभीषण ही तस्करों को छापेमारी की सूचना लीक कर देते हैं। जिसके चलते मौके पर केवल सुलगती भट्ठियां ही पुलिस को मिलती है। जिसके बाद पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भट्ठियों एवं लहन नष्ट करने की कार्रवाई कर वापस लौट जाती है।

