- उत्खनन में मिले भारी विनाश के संकेत
- हस्तिनापुर की धरती उगलेगी कई रहस्य
- पड़ताल में जुटी एएसआई की टीम
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारतकालीन तीर्थ नगरी हस्तिनापुर स्थित उल्टाखेड़ा और पांडव टीला में चल रहे उत्खनन महाभारत काल के साथ कई अन्य कालों का खुलासा होने की एएसआई के अधिकारियों को उम्मीद है। टीले पर चल रही खुदाई से हजारों वर्ष पुराने रहस्यों से पर्दा उठने के साथ हस्तिनापुर को अपनी पहचान मिलने की उम्मीद भी है।

1952 में हस्तिानपुर हुए उत्खनन में भी हजारों वर्ष पुराने कई रहस्यों पर से पर्दा उठा था, लेकिन उत्खनन का कार्य बीच में रुकने के चले कई रहस्य गर्भ में दबे रह गये थे। एएसआई का सर्किल आॅफिस मेरठ में खुलने के बाद हस्तिनापुर की धरती इतिहास का नया रहस्य उगलने को तैयार है।
आॅफिसर्स का कहना है कि हस्तिनापुर की धरती अपने सीने में कई बड़े रहस्य दबाये है। पांडवों की यह धरती नया रहस्य उगलेगी। भारतीय पुरातत्व विभाग अब मिशन हस्तिनापुर में जुट गया है। अब तक एएसआई के अधिकारी हस्तिनापुर के बर्बादी का कारणों के करीब तो पहुंचे है, साथ ही कई अन्य रहस्यों से पर्दा उठाने की तैयारी में भी है।
एएसआई की टीम यहां कैंप लगाकर महाभारत के अर्जुन की तरह मछली की आंखों को निशाना बनाकर अपना लक्ष्य साधना शुरू कर चुकी है। आजकल अधिकारियों की यह टीम तकरीबन चार घंटे सुबह और चार घंटे शाम को भूमि की परत उकेर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में न सिर्फ हस्तिनापुर के रहस्यों पर से पर्दा उठेगा, बल्कि यहां ऐसी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं होंगी कि टूरिस्ट खिंचे चले आएंगे।
अधीक्षण पुरातत्वविद डा. दिबिषद ब्रजसुंदर गड़नायक के निर्देश पर एएसआई की टीम फिर हस्तिनापुर के जंगल में पांडव टीले में उन्हीं भवनों को ढूंढ रही है, जिसका इतिहास में वर्णन है। टीम की कोशिश है कि महाभारतकालीन अवशेष जो कई सालों से मिट्टी में ही दफन हैं, उनको दुनिया के सामने लाया जा सके।
पांडव टीला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत सुरक्षित है। समय-समय पर टीले से पौराणिक अवशेष मिलते रहे हैं। इन अवशेषों को एएसआई कार्यालय पर तैनात कर्मचारी संरक्षित कर लेते थे। शुरुआती कार्य में एएसआई टीम ने जयंती माता मठ, राजा रघुनाथ महल व अमृत कूप के समीप स्थानों को तराशा और उनके इर्द-गिर्द सफाई की व्यवस्था कर उत्खनन के कार्य में जुटी है, जिसमें अब तक दर्जनों रहस्यों से पर्दा भी उठ गया है।
साथ ही टीम के सदस्यों को अभी महाभारत काल सहित कई अन्य राजों से पर्दा हटने की उम्मीद है। उत्खनन कार्य में अब तक टीम को हस्तिनापुर के विनाश के कई तथ्य मिले हैं। उत्खनन विशेषज्ञों की मानने तो हस्तिनापुर के विनाश का सबसे बड़ा कारण गंगा में कई बार आने वाली बाढ़ है, जिसके सक्ष्य उत्खनन के दौरान टीम को मिले हैं।
उत्खनन के दौरान मिले चावल के दाने और उड़द की दाल
उल्टा खेड़ा टीले पर चल रहे उत्खनन कार्य में रविवार को एएसआई की टीम को चावल के दाने और उड़द की दाल के दाने मिले हैं। जिन्हें जांच के लिए संरक्षित किया गया। साथ ही ऐतिहासिक और मौर्य काल में बच्चों द्वारा खेल के रूप में प्रयोग की जाने वाली घोड़ा गाड़ी का पहिया भी मिला इससे पूर्व टीम को लगातार लोह अयस्क किल, हसिया, ताम्र सलाका, टेराकोटा की मूर्तियां, शतरंज की मोहरें, मंकी, चूड़िया, लैम्पी, कौड़ी, बर्तनों में इंकपाट, कटोरा, थाली, गिलास, कटौरी, घड़ा, खाना बनाने का बर्तन उत्तर कालीन चमकीली मृदभांड की डिलक्स वैराइटी, मौर्य कालीन सिक्का समेत अन्य अवशेष मिले हैं।
कई संस्कृति का हस्तिनापुर में हुआ विनाश
पुरातत्व विभाग द्वारा उल्टा खेड़ा टीले पर किये जा रहे उत्खनन में कई हस्तिनापुर में बार-बार बाढ़ आने के साक्ष्य मिले हैं। हस्तिनापुर स्थित एएसआई विभाग के पास चल रहे उत्खनन कार्य में एक टेंच से हस्तिनापुर में बार-बार भारी बाढ़ और बाढ़ से विनाश हाने के साक्ष्य मिले हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों की माने तो हस्तिनापुर में भारी बाढ़ के साक्ष्य मिले हैं और इस दौरान कई संस्कृति विनाश के काल में समा गई। उत्खनन के दौरान मिले बालू रेत भी हस्तिनापुर में बाढ़ आने के साक्ष्य दर्शाता है।

