- तीन दिन से मोबाइल बंद, पूरा परिवार परेशान
- यूक्रेन बार्डर पर आखिरी बार हुई थी बात
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यूक्रेन पर रुस के हमले का परिणाम चाहे जो हो, लेकिन यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे मेरठ के लोगों के परिवारों में चिंता का माहौल बना हुआ है। जो लोग किसी तरह से देश लौटकर आ गए हैं। उनके घरों में खुशियां बिखरी हुई है और जिनके बच्चे अभी लौटकर नहीं आ पाये हैं।
उनके घर में हर कोई ईश्वर से प्रार्थना करने में लगा हुआ है कि किसी तरह से बच्चे को सकुशल वापस भेज दिया जाए। ऐसे ही हुमायंूनगर का छात्र यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और तीन दिन पहले घर आने के लिये बार्डर पर पहुंच गया था। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क न लगने के कारण पूरा परिवार परेशान है और मदद की गुहार लगा रहा है।

हूमायूंनगर में रहने वाले आईए खान का बेटा अजीम इवानो से एमबीबीएस पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है। बेटे के गम में डूबे खान आंसू छुपाने को तीन दिन से चश्मा पहने हुए हैं। खान कहते हैं मैं आदमी हूं, अपना गम दिखा नहीं सकता। क्योंकि मुझे पत्नी, बच्चों को संभालना है।
मुझे टूटने की इजाजत नहीं, लेकिन मैं एक बाप भी हूं, जो अपने बेटे की याद में तड़प रहा है। पत्नी से छिपकर बाथरुम में रोकर दिल हलका कर लेता हूं। अजीम पिछले 3 दिनों से यूक्रेन बॉर्डर पर लापता है। परिवार ने बेटे की 3 दिन से न आवाज सुनी, न वीडियो काल के जरिये चेहरा देखा है।
घर में एक खामोश खौफ है, रिश्तेदारों का आना जाना लगा हुआ है। छोटी बहने हर वक्त मोबाइल मिलाती रहती है। क्या पता कब भाई का फोन आ जाए। नेटवर्क ने पूरे परिवार की पिता खान ने दैनिक जनवाणी को बताया कि यूक्रेन में हालात बिगड़ने पर अजीम 23 फरवरी की रात रोमानिया यूक्रेन बॉर्डर तक किसी तरह पहुंचा था।
23 फरवरी की रात 9 बजे तक हमारी उससे बात हुई। उसके बाद से हमारा संपर्क बेटे से टूट गया है। उसके दोस्तों से भी कांटेक्ट नहीं हो पा रहा। बेटे की मदद को जो एजेंट वहां था वो भी मिसिंग है। हम समझ नहीं पा रहे कहां जाएं, क्या करें। किसका दरवाजा खटखटाएं मदद मांगे।
कम से कम उससे एक बार बात तो हो जाए। उसका फोन बंद है। बेटे की एक झलक पाने को तड़पती बेबस मां नूरजहां अपने जिगर के टुकड़े को देखने के लिए छटपटा रही है। मां की भावनाएं अब जवाब दे रही हैं। 72 घंटे से खुद को संभाल रही मां कहती है अब मैं टूट रही हूं।
अजीम की छोटी बहन आइशा लखनऊ से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है, भाई से संपर्क टूटने के बाद आइशा खुद को रोक न सकी और घर चली आई है। तीन दिन से आइशा ने अपनी किताब भी नहीं खोली, बस सारे फोन हाथ मे ंलेकर बार-बार चैक करती है। 90 साल की बूढ़ी नानी भी अपनी बेटी का दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाई और 24 फरवरी को गांव से बेटी के पास आ गई है।
यूक्रेन में बिलखते बच्चों का दर्द…
यूक्रेन में फंसे करीब 14,00 भारतीयों को लेकर छह उड़ाने अब तक भारत आ चुकी हैं। जल्द ही और हिन्दुस्तानी वापस आएंगे। इस बीच एक बेहद मार्मिक तस्वीर यह सामने आई है। तस्वीर ये है कि रूसी सैनिकों के हमले से बचने के लिए छात्रों ने पेपर पर हाथों से तिरंगा बनाया और उसे अपनी ढाल बनाकर आगे बढ़ रहे हैं।

दरअसल, 200 से ज्यादा भारतीय छात्र कीव में चार दिन से फंसे थे। इन्हें निकालना इंडियन एबेंसी के लिए सबसे मुश्किल साबित हो रहा था। जत्थे में शामिल तमन्ना त्यागी ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से तिरंगा झंडा सभी ने हाथों से बनाया था। करीब एक दर्जन तिरंगे पेपर पर बनाए गए। ट्रेन के बाहर भी एक तिरंगा लगाया गया था, ताकि रूसी सेना कोई हमला न कर सके। कीव से रोमानिया का सफर करीब 800 किमी का हैं। तमन्ना का कहना है कि कीव से निकलना ही बेहद मुश्किल था। चारों तरफ तबाही का मंजर ही दिखाई दे रहा था। धमाके और लाशें ही पड़ी हुई थी।
हमारे खरखौदा संवाददाता ने यूक्रेन से लौटी तमन्ना त्यागी से बातचीत की। यूक्रेन में फंसी पांची निवासी तमन्ना त्यागी सोमवार सुबह 7:00 बजे दिल्ली पहुंच गई थी। वहीं, दिल्ली पहुंचे रिश्तेदारों का तमन्ना से मिलकर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हंसी खुशी अपने साथ ले गए। पांची निवासी तमन्ना त्यागी पुत्री अतुल त्यागी यूक्रेन के जवानों फैकिवसक मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही है।
रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने पर पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को परेशानी पैदा हो गई और खाने-पीने के साथ पैसे की समस्या हो गई। शुक्रवार शाम सड़क मार्ग द्वारा रोमानिया पहुंचे, रविवार रात हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लाया गया। सुबह 7:00 बजे दिल्ली पहुंचने पर तमन्ना को लेने के लिए उनकी बुआ दिल्ली स्थित हस्ताल निवासी गीता त्यागी परिजनों के साथ पहुंची तो बुआ को देख तमन्ना का खुशी का ठिकाना नहीं रहा और बुआ के साथ उनके आवास पर चली गई। वहीं, तमन्ना की मां रीना त्यागी ने बताया कि तमन्ना को हल्की चोटें आई हैं। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार करने के बाद आराम करने की सलाह दी है।
चिंता में मां कर रही बेटे के लिए दुआ
बेटे इजहार की चिंता में मां बूंदी खाना भी नहीं खा रही है। अपनी लाडले की राह देख आंखें पथरा गई हैं। आंखों से आंसू सूखने लगे हैं। मिर्जापुर निवासी इदरीश त्यागी ने बताया कि उनकी पत्नी वह बेटे जावेद और दिल्ली में रह रहे डा. अब्दुल कलाम की बात यूक्रेन में फंसे छोटे बेटे इजहार से फोन द्वारा हो रही थी। वहां के हालात लेकर बहुत चिंता है। इजहार ने बताया कि वहां भोजन की बहुत कमी हो गई है।

अपने पास जमा भोजन सामग्री बचाने को वह उतना ही खा रहे हैं। जिससे जीवन चल जाए। इदरीश त्यागी ने बताया कि कल रात 12 के बाद से बेटे इजहार से बात नहीं हो पाई है। वहां पर टैक्सी वालों ने किराए भी तीन गुणा कर दिए हैं। गूगल पे द्वारा हम पैसे भेज रहे थे। कल से बात न होने पर परिजन परेशान नजर आ रहे हैं। मां बूंदी कहती है कि इजहार कभी भूखा नहीं रहा। बेटे से चार दिन से बात नहीं हुई है। वह बेटे की सलामती के लिए पांच दिन की नमाज अदा कर रही है।
यूक्रेन से पोलैंड पहुंचे छात्रों को लौटना पड़ा
रूसी सेना ने यूक्रेन के कई हिस्सों पर बमबारी की है। वहीं, यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे मेरठ के एक ग्रुप में शामिल डेढ़ दर्जन छात्र यूक्रेन से पोलैंड बॉर्डर पहुंच गए थे। जिनको अब दोबारा अपने हॉस्टल लौटना पड़ा। इस दौरान भारी बर्फबारी के चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब दोबारा से रोमानिया जाने की तैयारी कर रहे हैं।

पोलैंड बॉर्डर पर इंडियन नो आउट के सेंटेंस सुनने के उपरांत और भारी बर्फबारी के चलते मेरठ जिले के मुख्य रूप से शाहजहांपुर, किठौर के एमबीबीएस छात्रों का ग्रुप पोलैंड बॉर्डर छोड़कर दोबारा लवीव शहर यूनिवर्सिटी कैंपस हॉस्टल सिक्स में पहुंच गये हैं। जिनमें इनके साथ एक युवक फाइज पुत्र बाबू निवासी शाहजहांपुर आपस में गुम हो गया था। मगर सुबह वह भी हॉस्टल पहुंच गया।
अब इन बच्चों के परिजनों की फोन पर 7:25 पर हुई बात के अनुसार छात्र अब दुबारा रोमानिया जाने के लिए कैब का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया यह मेरठ जिले के लगभग डेढ़ दर्जन छात्र हैं। बच्चों के परिजनों ने बताया कि छात्रों के पास रुपये भी नहीं बचे हैं। एटीएम चल नहीं पा रहा है और जो उनको कार्ड दिया गया है। उसने भी काम करना बंद कर दिया है। परिजनों ने आगे बताया कि सफर में जहां का किराया 1000 रुपये लगता था।
उनसे 6 से 7 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इसके अलावा वहां की फोर्स भी उनके साथ बदसलूकी कर रही है। भारतीय दूतावास के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कोई स्पष्ट बात नहीं कर रहा है। कभी पोलैंड और कभी कहीं, जिसकी वजह से छात्र और परेशान हैं। रात हुई बर्फबारी की वजह से और खुले आसमान के नीचे कहीं पैदल और कहीं केब में आने से छात्र थके हुए हैं। बिस्किट, चॉकलेट इसके अलावा उनको खाने को कुछ नहीं मिल रहा।
अहमद नवाज खान के पिता शहजाद खान निवासी कस्बा शाहजहांपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनका पुत्र इसी वर्ष यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गया था। वहां रूस के हमले के बाद वह अपने साथियों संग पोलैंड बॉर्डर पहुंच गए था। मगर अब दोबारा फिर यूक्रेन के शहर में अपने हॉस्टल में पहुंच गया है।
उनकी वहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि अन्य देशों के बच्चों के साथ व्यवहार ठीक हो रहा है और उनको उनके देश भेजा भी जा रहा है। मगर भारत के बच्चों का पासपोर्ट देखने के बाद उनके साथ बदतमीजी हो रही है। छात्रों से हुई बात में उन्होंने बताया कि एक बार भारतीय दूतावास के लोग आए थे और उन्होंने बिस्किट और चॉकलेट के पैकेट दिए थे और माइनस छह डिग्री सेल्सियस तापमान था।
पूरी रात खुले आसमान के नीचे काटनी पड़ी थी। अब हमारे फोन भी बंद होने लगे हैं। चार्ज करने का कोई साधन नहीं है। जिसकी वजह से हमारी परेशानी बढ़ती जा रही है। अहमद नवाज के साथ वहां पर मौजूद छात्र फाइज, शोएब और कई इस क्षेत्र के छात्र मौजूद हैं। छात्रों के परिजनों ने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि अब बच्चे रोमानिया बॉर्डर की तरफ जाने की बात कर रहे हैं। बच्चों के परिजन दहशत में है।
बताते चलें कि यूक्रेन में किठौर, शाहजहांपुर, ललियाना, राधना, सरावनी आदि जगहों के दर्जनों बच्चे यूक्रेन में मेडिकल के कोर्स एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए हुए हैं। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद जहां उनकी पढ़ाई बाधित हुई है। वहीं, उनको अपने घर पहुंचने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पोलैंड के बॉर्डर पर फंसे बच्चों के परिजनों का भारत सरकार से यही आग्रह है कि वह उनके बच्चों को देश में लाने में उनकी मदद करें। जिससे उनके घर के चिराग अपने अपने घर पहुंच सके।
पोलैंड बॉर्डर से साथियों संग हॉस्टल पहुंची काजल वर्मा
रोहटा रोड सरस्वती विहार दिलावर प्लेस निवासी काजल वर्मा पोलैंड बॉर्डर पर अपने साथियों संग बड़ी मुश्किल के दौर में थी। यूक्रेन की सेना द्वारा भारतीय छात्राओं के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। रविवार रात वह अपने 5-6 साथियों के साथ पोलैंड बॉर्डर से करीब 80 किमी दूर एक हॉस्टल में पहुंच गई है। वहां पर यूक्रेन सेना द्वारा इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।

जिससे वह अपने आप को घुटन महसूस कर रहे हैं। उनके मोबाइल बंद करा दिए जाते हैं। अंधेरे में उनको रखा गया है। हालांकि भारतीय दूतावास ने भारतीय छात्रों के लिए खाने के लिए पैकेट भेजे हैं, लेकिन वहां हालात इतने भयानक हो गए हैं कि भोजन के पैकेट को लेकर छीना झपटी हो गई। ऐसे हालात में किसी के हाथों एक पैकेट लगा तो किसी के पास कई पहुंच गए। अब छात्र वहां को खुद को घिरा महसूस कर रहे हैं। काजल के पिता विनोद वर्मा ने बताया के सोमवार शाम को करीब 6:30 बजे उनकी बिटिया से बात हुई है।
आने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पा रही। काजल वर्मा के साथ देहरादून और महाराष्ट्र सहित अलग-अलग भारत के राज्यों के पांच छात्राएं और मौजूद हैं। घर में बिटिया के लिए परिवार के सभी लोग बेचैन हैं। सभी भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी बिटिया जल्दी वापस लौट आए।
रूस-यूक्रेन तनाव का असर बिल्डिंग निर्माण सामान के दामों पर भी
पूरी दुनिया में रूस-यूक्रेन संकट का असर दिखाई देना शुरू हो चुका है। भारत में भी भवन निर्माण समाग्री से जुड़े सामान की कीमतें बढ़ने लगी है। मेरठ में बिल्डिंग मेटीरियल कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने भी इसको लेकर बताया कि लोहे के दाम तो बढ़ गए हैं। जबकि अन्य सामान की कीमते भी जल्द बढ़ सकती हैै।

नितिन बंसल, बागपत रोड स्टील इंंडस्ट्री के अध्यक्ष का कहना है कि बिल्डिंग मेटीरियल के दामों बढ़ोतरी होने लगी है। इसके पीछे कारण ये है कि जो कोयला आता था वह फिलहाल रुक गया है। स्टील फैक्ट्रियों की भट्ठियां कोयले से ही चलती है जिनपर असर पड़ रहा है।
तेल के दामोें का असर भी पड़ रहा है, क्योंकि हर काम किसी न किसी रूप से इसी से जुड़ा हुआ है। लोहे की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है, लोग कम खरीद रहे हैं। पिछले चंद दिनों में ही 10 रुपये प्रति कुंतल का उछाल आ चुका है। युद्ध से पहले जिस लोहे की कीमत 62 रुपये प्रति कुंतल थी। अब वह 70 रुपये तक पहुंच गई है और आगे भी बढ़ने की ही संभावना है, यह हर क्वालटी के सरिए पर लागू है।
इसके पीछे रूस-यूक्रेन का युद्ध ही वजह है, माल आने में परेशानी हो रही है। सभी काम एक-दूसरे से जुड़े है। मेरठ में 50 व्यापारी है, जो लोहे के सामान का काम करते हैं। सभी पर इसका असर पड़ रहा है। युद्ध बंद होना चाहिए यह आम लोगों के लिए भी सही नहीं है। इसका असर सभी पर पड़ रहा है। वॉर में क्या रखा है, पहले से ही प्राइज और ट्रेड वॉर चल रहा है।
गोपाल, बिल्ंिडग मेटीरियल व्यापार संघ टीपी नगर का कहना है कि युद्ध को अभी कुछ दिन हुए है। जिसका असर अब आने वाले समय में सीमेंट के दामों पर पड़ने की पूरी संभावना है। हालांकि सीमेंट बुलंदशहर व मंगलौर में बनता है, लेकिन उसकी ढुलाई के खर्च में बढ़ोतरी होगी।
क्योंकि युद्ध से कच्चे तेल के दाम बढ़ने जा रहे हैं। जिसका असर सीमेंट के दामों पर भी पड़ेगा। फिलहाल रोड़ी डस्ट गाड़ियों से 88 से 90 रुपये प्रति कुंतल के रेट पर उतर रहा है। सीमेंट का भी साढ़े तीन से चार सौ रुपये कट्टे का रेट चल रहा है, लेकिन यह बढ़ेगा। युद्ध रुकना चाहिए, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

