- सफाई की बाट जोह रहे गंदगी वाले क्षेत्र सुविधा से महरूम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: निजी कंपनी के दम पर शहर में बेहतर साफ-सफाई और स्वच्छता का दावा करने वाला नगर निगम गंदगी वाले इलाकों को नई कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था में भी छूने से डर रहा है। अभी तक शहर के जिन 15 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए वाहनों को घुमाया जा रहा है उनमें अधिकांश पॉश इलाके हैं। जहां कूड़े का पहले से ही बेतहर प्रबंधन होता रहा है। इतना ही नहीं इन क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था भी पूर्व से ही बेतहर रही है। जिन इलाकों को सफाई और स्वच्छता की फिलहाल वाकई जरुरत है उनको अभी इस नई व्यवस्था से महरुम रखा जा रहा है।
नई कूड़ा प्रबंधन नीति को लागू कर भले ही नगर निगम अधिकारी अपनी पीठ थपथपाए, मगर सफाई की बाट जोहने वाले शहर के इलाकों की हालत बद से बदतर है। पहले ही चरण में उनसे विभाग का दूरी बनाना निजी कंपनी और नगर निगम व्यवस्था की पोल खोल रहा है। यह तब है जब नगरायुक्त मनीष बंसल ने एक मार्च से पहले चरण में 25 वार्ड से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का दावा किया था।
शायद उनका यह दावा शहर की सफाई की हालत की जमीनी हकीकत जाने बगैर था। यही वजह है कि 25 वार्ड के बजाए पहले चरण में मात्र 10 और दूसरे चरण में पांच वार्ड को ही बढ़ाया गया है। यानी शहर के 15 वार्ड में ही निजी कंपनी के 30 वाहनों को कूड़ा उठाने के लिए घुमाया जा रहा है। हालत यह है कि इन वार्ड में सभी जगहों पर वाहन कूड़ा लेने नहीं पहुंच पा रहे हैं। जबकि इन इलाकों की सफाई व्यवस्था शहर के दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले पहले से ही कहीं अधिक बेतहर है।
वहीं, इस संबंध में अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार का कहना है कि पहले चरण के बचे 10 वार्ड में कूड़ा कलेक्शन वाहनों का आवंटन शीघ्र ही किया जायेगा। अभियान की शुरुआत में इस बात को परखा जा रहा है कि घरों से कूड़ा लेने में कहां पर क्या-क्या समस्याएं सामने आ रही है। उनकी समीक्षा की जा रही है और बीवीजी कंपनी अधिकारियों से बेहतर कार्य करने को समन्वय बनाया जा रहा है। मकानों पर क्यूआर कोड चस्पा करने का कार्य सर्वेयर कर रहे हैं।

