Wednesday, May 6, 2026
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दंश: कोरोना की दूसरी लहर में मौत, परिजनों को नहीं मिली मदद

  • कोरोना से मौत हुई इसका कोई सुबूत नहीं है परिवारों के पास
  • बच्चों की फीस देने के लिए भी पैसे नहीं है परिवारों के पास

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मार्च 2021 से मई तक कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश में कोहराम मचाया था। जिसमें मेरठ में ही सैंकड़ो परिवारों के सिर से मुखिया का साया उठ गया। वहीं, इन परिवारों के पास इस समय दो जून की रोटी भी नहीं है। बेहद कठिन परिस्थितियों में यह परिवार अपना पेट पाल रहे हैं। प्रशासन से इनको किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।

रामभजन उम्र 39 की मौत 5 मई 2021 को हुई थी, पत्नी शिमला ने आंखों में आसूं लिए बताया कि वह एक आशा कार्यकत्री है। पति को सांस लेने में परेशानी हुई तो वह उसे लेकर आसपास के अस्पतालों में गई, लेकिन कहीं भी बेड खाली नहीं मिला। पति की हालत बिगड़ी तो वह उसे घर पर ही लेकर आई और किसी तरह इलाज शुरू किया, लेकिन जान नहीं बच सकी। परिवार में दो बेटियां दिव्या 18 वर्ष, तुलसी 16 वर्ष व एक बेटा श्याम 9 वर्ष है।

पति की मौत के बाद से पूरा परिवार टूट गया है। खुद दूसरों के घरों में काम करते हुए किसी तरह बच्चों का पेट पाल रही है। मुआवजा इस लिए नहीं मिला क्योंकि पति को किसी अस्पताल में भर्ती नहीं करा सकी। इसी वजह से उसके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि पति की मौत कोरोना से हुई है। कोई जनप्रतिनिधि भी कभी उनसे मिलने नहीं आया।

मुनेश पाल उम्र 40 वर्ष की मौत भी दूसरी लहर के दौरान हुई। मृतक की पत्नी रजनी पाल ने बताया कि पति रात को नौ बजे काम से वापस लौटे थे। खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे कि तभी उनके सीने में अचानक दर्द शुरू हो गया और देर रात 12.30 पर उनकी मौत हो गई। हालांकि मृत्यु से पहले उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपना इलाज कराने के बदले काम पर जाते रहे।

परिवार में मृतक की पत्नी, मां कश्मीरी, बेटा वंश 13 साल, अंश 10 साल व बेटी हर्षिका 15 है। मुनेश की मौत के बाद परिवार को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसी तरह बच्चों का पेट भरनें के लिए मां को मजदूरी करनी पड़ रही है। सुषमा की मौत 3 अप्रैल 2021 को हुई थी, मृतका के जेठ किरणपाल ने बताया कि सीने में दर्द उठने पर उसे पास के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ समय बाद ही सुषमा की मौत हो गई।

अस्पताल वालों ने मौत का कारण साफ नहीं किया, बस बताया कि दिल का दौरा पड़ा था। मुआवजे के लिए क्लेम नहीं कर सके क्योंकि मृतका की मौत की वजह साफ नहीं थी और उनके पास कोरोना से मौत होने का प्रमाण-पत्र नहीं था। इस तरह के अनगिनत मामले है जिनमें कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मौत हुई, लक्षण भी कोरोना के थे, लेकिन मौत के बाद मृतक के परिवारों के पास कोरोना से मौत का कोई प्रमाण नहीं था। इस कारण यह परिवार किसी मुआवजे के हकदार नहीं बन सके। अब यह परिवार मुफलिसी के बीच किसी तरह अपना जीवन जी रहे हैं।

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