Wednesday, January 26, 2022
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कोरोना संक्रमण के बाद दवाओं पर भी महंगाई की मार

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  • 30 फीसदी तक महंगी होने की वजह से खैरनगर का दवा कारोबार प्रभावित
  • केवल बेहद जरूरी दवाएं ले रहे हैं मरीज, शुगर व हार्ट की दवाओं की बिक्री घटी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दवाएं भी महंगाई की मार से नहीं बच सकी हैं। दवाओं के दामों पर करीब तीस फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। महंगी दवाओं के कारण आम आदमी की जेब पर कब बोझ पड़ा, पता नहीं चला। लेकिन दवा कंपनियों को मनमानी की इजाजत देकर सरकार ने आम आदमी पर जरूर बोझ बढ़ा दिया है। इसके साथ ही दवाएं महंगी होने से दवाओं के कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

दवाओं की थोक मार्केट खैर नगर का कारोबार अब घटकर मुश्किल से 40 फीसदी तक रह गया है। वहीं दूसरी ओर दवाओं के महंगे होने की वजह से लोगों ने तो कुछ दवाओं को सेवन ही बंद कर दिया है। उन्होंने खुद को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।

अनलॉक के बाद रेटों में उछाल

कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के बाद जब संपूर्ण आनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गयी तभी से दवाओं के मूल्यों में तीस फीसदी का एकाएक उछाल आया है। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोएिशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि ऐसा नहीं कि किसी खास दवा पर रेट बढ़ाए हों। दवा कंपनियों ने तमाम दवाओं पर तीस फीसदी तक के दाम बढ़ा दिए हैं। सबसे बुरा हाल तो ब्रांड कंपनियों का है।

इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि जो मरीज महंगी दवाएं नहीं खरीद सकते या जिनका घरेलू बजट दवाओं की महंगाई ने बिगाड़ कर रख दिया है। उन्होंने दवाओं का सेवन कम या फिर बंद कर दिया है। मसलन यदि किसी हार्ट पेशेंट के पर्चे में पांच दवाओं के साथ दवा के नाम पर एक कैलशियम की गोली लिखी है तो मरीज कैलशियम की गोली के बगैर ही काम चला रहा है।

कुछ मरीज ऐसे हैं जो महीने भर की दवा के बजाए अब 15 दिन की दवा ले रहे हैं। जो दवाएं प्रतिदिन लेने की सलाह डाक्टर ने दी है उस दवा को एक दिन छोड़कर ले रहे हैं।

कंपनियों के महंगाई बढ़ाए जाने के बाद अब दवाओं की बिक्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। खैरनगर के दवा कारोबारी बताते हैं कि केवल बेहद जरूरी दवाओं की बिक्री हो रही है। ऐसी दवाओं में हार्ट, शुगर, न्यूरो लोजिस्ट सरीखे चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली दवाएं ही बिक रही हैं।

इन दवाओं को अब जीवन रक्षक का दर्जा हासिल है। लेकिन कई मरीज ऐसे हैं जो महंगाई की वजह से इन दवाओं के नियमित सेवन के बजाए विकल्प के तौर पर सेवन करने लगे हैं। इसके अलावा बुखार में यदि डाक्टर तीन प्रकार की दवाएं लिखते हैं तो मरीज पर्चे में अब उसमें लिखी सिर्फ एक दवा जो बुखार या खांसी के लिए बेहद जरूरी हो सिर्फ वो ही मांगता है।

जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि अनलॉक के बाद दवाओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि की गयी है। इससे दवा कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सरकार को दवाओं के दामों पर अंकुश लगाना चाहिए। यह लोगों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। दवाएं सस्ती की जानी चाहिए।

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