Saturday, January 22, 2022
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डाक्टरों की तरह फार्मेसिस्ट भी खोल सकेंगे क्लीनिक

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  • प्रस्ताव को केंद्र सरकार से मिली मंजूरी, राय देने के बदले फीस भी ले सकेंगे
  • सरकार का तर्क, इससे लग सकेगी झोलाछाप पर प्रभावी ढंग से रोक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल स्टोरों पर नौकरी करने वाले फार्मेसिस्ट अब डाक्टर के समान दर्जा हासिल करने जा रहे हैं। सरकार ने इस आशय के प्रस्ताव पर मोहर लगा दी है। इसके बाद फार्मेसिस्ट भी मरीजों को देख सकेंगे। उन्हें दवा व सलाह दे सकेंगे।

हालांकि सरकार का यह निर्णय एलोपैथी के चिकित्सकों के गले नहीं उतर रहा है। वहीं दूसरी ओर आयुर्वेद के वैद्यों को सर्जरी करने के अनुमति दिए जाने के बाद मोदी सरकार को यह एलोपैथी के डाक्टरों को दूसरा झटका माना जा रहा है।

एलोपैथी से जुड़ी देश की सबसे बड़ी चिकित्सकीय संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से हालांकि अभी इस पर प्रक्रिया आनी बाकी है। लेकिन निजी तौर पर शहर के कई डाक्टर यहां तक कि सरकारी अस्पतालों व मेडिकल में सेवाएं देने वाले डाक्टर भी सरकार के इस निर्णय को दुनिया भर में भारतीय चिकित्सा की फजीहत कराने वाला बता रहे हैं।

मेडिकल स्टोरों पर जो फार्मेसिस्ट अब तक डाक्टरों का पर्चा देखकर मरीज देख लिया करते थे, उनके दिन फिरने तय हैं। ऐसे फार्मेसिस्ट अब मेडिकल स्टोर पर आने वाले मरीजों को खुद देख सकेंगे। उन्हें सलाह भी दे सकेंगे। इसकी एवज में वो इन मरीजों से फीस भी वसूल कर सकेंगे।

फार्मेसी एक्ट में प्रावधान

भारत सरकार के फार्मेसी प्रैक्टिस एक्ट रेग्युलेशन 2015 में इसके प्रावधान की बात कही जा रही है। इसके प्रभावी होने के बाद अब फार्मेसिस्टों को दवा लिखने का कानूनी अधिकारी मिल जाएगा। सरकार के इस निर्णय के साथ खडे होने वालों का कहना है कि इससे झोला छाप डाक्टर जो मरीजों की मौत का कारण बनते हैं उन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। इस कानून के आने से पहले फार्मेसिस्ट मेडिकल स्टोरों पर आने वालों को मुफ्त सलाह देते थे।

डाक्टरों की तर्ज पर क्लीनिक

इस कानून के आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि जो फार्मेसिस्ट मेडिकल स्टोरों पर काम कर रहे हैं वो अब एलोपैथी डाक्टरों की तर्ज पर अपना क्लीनिक खोल सकेंगे। देश की चिकित्सका व्यवस्था में इसे बडेÞ बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इसके साइड इफैक्ट को लेकर अभी तक सभी चुप्पी साधे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि इस कानून का अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। लेकिन इसके फायदों से ज्यादा नुकसान गिनाए जा रहे हैं।

यह कहना है ड्रगिस्ट एसोसिएशन का

जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि सरकार ने यह प्रावधान कर दिया है। बी फार्मा व डी फार्मा को क्लीनिक खोलने की अनुमति दी गयी है। इससे फायदा यह होगा कि डाक्टरों के यहां भीड़ कम होने से उनका एकाधिकार खत्म हो सकेगा साथ ही इससे झोलाछाप पर भी अकुंश लगेगा।

ये कहना है सीएमओ का

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि यह पहले से कानून मौजूद है। संभवत: इसकी समुचित जानकारी नहीं हो सकी है। इसमें फार्मेसिस्ट को क्लीनिक चलाने की अनुमति दी गयी है।

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